नई दिल्ली : सरकार ने 25 और 26 जून को आपातकाल विरोधी दिवस के तौर पर मनाने का फैसला किया है और अपने सभी मंत्रियों को पूरे देश में कार्यक्रम का आयोजन कर लोगों को याद दिलाने को कहा है कि कैसे पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1975 में आपातकाल लगाया था।

आपातकाल को स्वतंत्र भारत के संवैधानिक लोकतंत्र काे काला दिवस बताते हुए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री एम वेंकैया नायडू ने सभी मंत्रियों को पत्र लिखकर उनसे कहा है कि वे भाजपा की राज्य इकाइयों के अध्यक्ष के अनुरोध पर खुद को उपलब्ध कराएं ताकि वे दर्शा सकें कि पार्टी कैसे लोकतंत्र को महत्व देती है।

नायडू ने अपने पत्र में कहा, हम, एक लोकतांत्रिक और राष्ट्रवादी पार्टी हैं। हम यह दिवस लोकतंत्र को पलटने के खिलाफ अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करने के लिये मनाते हैं।

नायडू ने कहा, असली लोकतंत्र को हम कैसे महत्व देते हैं और लोगों के अधिकारों के पक्ष में हम कितनी दृढ़ता से खड़े होते हैं। इसे दर्शाने के लिये 25 और 26 जून को इस साल भी आपातकाल विरोधी दिवस के तौर पर मनाने का फैसला किया गया है।

उसी पत्र में नायडू ने मंत्रियों से एक या दो स्थानों का दौरा कर लोगों, व्यापारियों, व्यापारिक संगठनों, चैंबर ऑफ कॉमर्स और उद्योग से संवाद कर जीएसटी के फायदे और मुख्य बातों को स्पष्ट करने को कहा है। जीएसटी को एक जुलाई से लागू किया जाना है।

पत्र में कहा गया है, यद्यपि जागरूकता पैदा करने की प्रकिया पूरे देश में प्रिंट और इलेक्टॉनिक मीडिया के जरिये चल रही है लेकिन प्रधानमंत्री ने इच्छा जताई है कि केंद्रीय मंत्री जीएसटी के फायदों और मुख्य बातों को स्पष्ट करने की जिम्मेदारी खुद से लें।

साथ ही नायडू ने केंद्रीय मंत्रियों से 21 जून को अंतरराष्टीय योग दिवस को सफल कार्यक्रम बनाने के लिये समर्थन मांगा।

अपने पत्र में नायडू ने सभी मंत्रियों से 20 जून की रात को विशेष स्थान पर पहुंचने को कहा है क्योंकि कार्यक्रम अगले दिन सुबह शुरु होगा।