12.06.2018, मंगलवार

राजमहेंद्रवरम, पूर्वी गोदावरी जिला

पावन गोदावरी नदी के तट पर मैं आज पहुंचा। यहां के लोगों की लाइफलाइन बनी मां 'गोदावरी' के साथ खड़ा हूं ऐसा आभास हुआ। गोष्पाद तीर्थस्थल में गौतमी स्नान घाट पर मां गोदावरी को आरती देते समय ऐसा लगा कि करोड़ों लोगों का जीवनाधार बनीं उस मां की तरह... लोगों के लिए उपयोगी साबित होकर जन्मसार्थक होना ही मेरे लिए पर्याप्त है। जनकल्याण व रक्षा के लिये बालात्रिपुरासुंदरी समेत सुंदरेश्वरस्वामी की पूजा की।

पश्चिमी गोदावरी जिला खत्म होने के बाद जब मैं पूर्वी गोदावरी जिले में प्रवेश करते समय मुझे लगा की बगल में गोदावरी होने के बाद भी लोग पेयजल सहित लाखों समस्याएं जूझने को मजबूर हैं। पश्चिमी गोदावरी जिले के लोगों की परेशानियां मेरे मन में एक के बाद एक याद आती जा रही थीं।

चंद्रबाबू नायडू ने जिले के सभी निर्वाचन क्षेत्र में टीडीपी को विजयी बनाने वाले लोगों को एक तरह की सजा देकर उनका ऋण चुकाया है। इसी बात से नाराज होकर हर कीमत पर बाबू को जवाब देने की जिद्द कदम-कदम पर मुझसे मिले लोगों में साफ दिखाई दे रही थी।

कल शाम के वक्त गोदावरी नदी बनी लगभग 4.5 किलो मीटर लंबी रेल कम रोड ब्रिज पर खचाखच भरी भीड़ के बीच से मेरी प्रजा संकल्प यात्रा गुजरी। नीचे गोदावरी नदी के प्रवाह की आवाज तो ऊपर लोगों में उत्साह के बीच मैंने पूर्वी गोदावरी जिले में प्रवेश किया। ये मेरे लिए पूरे जीवन में कभी नहीं भूलने वाला अनुभव रहा। इसी ब्रिज पर पिताजी और बहन शर्मिला और आज मेरा पदयात्रा करना, तीनों को इंद्रदेव का आशीर्वाद मिलना एक मधुर अभास है।

जनता के लिये हमारे निकनले पर भगवान लोगों से हमारे लिए चलने के लिए कहना एक वरदान ही तो है। भारी बारिश और लोगों की खुशी के बीच सैकड़ों सालों के इतिहास वाले राजमहेंद्रवरम में कदम रखा। एक तरफ संस्कृति, परंपरा-कला, कवि, आंदोलन- सुधारों की याद आई, तो दूसरी तरफ केवल प्रचार के लिए पावन पुष्कर में भी 29 निर्दोष लोगों की मौत का कारण बने चंद्रबाबू के पापों की गठरी याद आई।

इस क्षेत्र के लोगों का सालों पुराना सपना पूरा करने के लिये पिताजी ने पोलावरम परियोजना की नींव रखी। पूरी इमानदारी के साथ उन्होंने हर संभव पद्धति में काम को आगे बढ़ाया। परंतु आज यही परियोजना चंद्रबाबू नायडू के लिए वरदान साबित हो रही है। राष्ट्रीय दर्जा प्राप्त यह बृहत परियोजना एक तरह से बड़े घोटाले का केंद्र बनाई गई है। राज्य के लोगों की नाड़ी बनी पोलवरम परियोजना के मामले में भी चंद्रबाबू का झूठे बयान देने के अलावा लोगों को गुमराह सोचनीय है। परियोजना पूरी होने से पहले ही उसे राष्ट्र के लिए समर्पित करने का बाबू का ऐलान उनकी सोच की पराकाष्ठा और विश्वासघात को दर्शाता है।

मुख्यमंत्रीजी मेरा एक सवाल है... क्या ये बात सच नहीं है कि आप जब सत्ता में थे तब पिताजी ने नेता विपक्ष के तौर पर विधानसभा में जल परियोजनाओं को गंभीरता नहीं लेने पर नामों-निशान मिटने की चेतावनी दी थीं और आपने उनकी अनदेखी की थी।

पोलावरम परियोजना के प्रति आपकी अनदेखी के विरोध में आप ही की पार्टी के विधायकों ने आपके खिलाफ बगावत पर उतारने के अलावा पदों से इस्तीफे भी दिये थे। क्या आप यह बात भूल गए? आपका यह सोचना बिलकुल गलत है कि पोलावरम नाम पर आपकी लूट की योजना और विशेष राज्य के दर्जे को गिरवी रखने की बात लोगों ने भुला दिया है। केवल कमीशन के लिये नामिशन पद्धति में सब-कांट्रैक्टरों को बढ़ाई गई दरों पर काम आवंटित करना क्या आपके भ्रष्टाचार के प्रतीक नहीं है? आप और कब तक इस तरह लोगों को धोखा देते रहेंगे?

वाईएस जगन