11.06.2018, सोमवार

कोव्वुरू, पश्चिमी गोदावरी जिला

शराब की बिक्री में अधिकतम दर का नियम कोव्वुरू निर्वाचन क्षेत्र के लिए लागू नहीं होता। सिर्फ बीयर और शराब को हेल्थ ड्रिंक बताने वाले आबकारी मंत्री का निर्वाचन क्षेत्र है कोव्वरु। ऐसे निर्वाचन क्षेत्र में कानून की रक्षा करने वाले अधिकारी सत्तारूढ़ दल के नेताओं के हाथ की कटपुतली बन गए हैं। अधिकारियों का शराब की बिक्री और जुआ क्लबों के संचालन में सहयोग करना दुर्भाग्य की बात है।

बाबू सरकार के प्यादे बन गए हैं अधिकारी

सरकार में बैठे बड़े लोग मनमानी ढंग से भ्रष्टाचार और धांधलियों को अंजाम देने के साथ पार्टीवार पक्षपात प्रदर्शित कर रहे हैं। इन सभी मामलों में चंद्रबाबू सरकार अधिकारियों का प्यादे के तौर पर इस्तेमाल कर रही है। एक दलित महिला सरपंच के साथ पक्षपात और प्रताड़ना का मामला मेरे सामने आया। चिक्काल गांव में विगत 20 वर्षों से टीडीपी के सरपंच ही थे, लेकिन अब वहां वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की दलित महिला के सरपंच बन जाने से टीडीपी काफी नाराज है। परिणामस्वरूप उक्त दलित सरपंच को गांव में किसी भी तरह का विकास काम करने से रोका जा रहा है।

महिला सरपंच के साथ मुझे मिले गांव के लोगों ने कहा, 'साहब यहां कलेक्टर काम मंजूर करते हैं... लेकिन निचले स्तर के अधिकारी उन कार्यों को आगे बढ़ने में रोड़ा बन रहे हैं। बाद में काम पूरा नहीं होने की शिकायत पर स्थानीय डीपीओ के जरिए नोटिस दिलवाया जाता है। साथ ही चेक पावर रद्द करने की धमकियां देते हैं। यह भी कहते हैं कि अगर काम पूरे करने हैं तो उन्हें पार्टी बदलनी होगी। अनिवार्य परिस्थितियों में हमें हर काम के लिए अदालत जाना पड़ रहा है। संभवत: चंद्रबाबू की दृष्टि में दलितों को परेशान करना ही दलितों का विकास और उन्नति है।

कलेक्टर रेवेन्यू रिकवरी कानून अमल करने में विफल

मुझसे मिले गांव के गन्ना किसानों ने कहा, '25 से अधिक बार कलेक्टर से भेंट करने के बाद भी हमें इंसाफ नहीं मिला है। चागल्लु शुगर फैक्ट्री से जो बकाया मिलना था वह अभी तक नहीं मिला है। कलेक्टर रेवेन्यू रिकवरी एक्ट का अमल किए बिना प्रबंधन का साथ दे रहे हैं।

ताड़ीपूड़ी मंडल के किसानों ने कहा, 'बिना किसी पूर्व नोटिस या सूचना, उचित मुआवजा दिये बिना पुलिस के बल पर जबरन बिछाए जा रहे 220 केवी टॉवर लाइन से हमें भारी नुकसान हो रहा है। इन लाइनों के कारण हमारी जमीनें बेकार हो रही है, लेकिन मुआवजे के तौर पर रजिस्ट्रेशन के मूल्य में केवल 10 प्रतिशत राशि दी जा रही है। इस बारे में कलेक्टर से शिकायत करने पर वह हमारा मजाक उड़ा रहे हैं। उन्हीं के पर्यवेक्षण में यह पूरा काम हो रहा है। जिले में आपकी पदयात्रा चलने की वजह से यहां की पुलिस और अधिकारी चले गए हैं। आपके इस जिले को पार करने के तुरंत बाद फिर से वे सभी यहां आकर बैठ जाएंगे।

उस क्षेत्र के किसानों ने बताया कि गोदावरी नदी में अत्याधुनिक मशीनों से रेत का खनन जारी है और हजारों लारियों में यहां की रेत की तस्करी हो रही है। इस सिलसिले में उन्होंने इससे पहले हाईकोर्ट में एक पिल भी दाखिल की थी। यहां जारी रेत की तस्करी को देखकर लोगों के मशीनों के साथ रंगेहाथ पकड़ने के बाद भी कलेक्टर ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। खुद वही इस धंधे को चलाएंगे तो उन्हें रोकने या टोकने वाला बचा ही नहीं है।

चार वर्षों से जिलाधीश का नहीं हुआ ट्रांसफर

इस जिले में अनेक धांधलियों के उजागर होने, इसके विरोध में कई आंदोलन चलने तथा कलेक्टर पर अनेक गंभीर आरोप लगने के बावजूद लगातार चार साल तक एक ही जगह पर बने रहना सत्तापक्ष के नेताओं के साथ उनके संबंधों को दर्शाता है। एक बात तो स्पष्ट हो गई है कि माइक के सामने चंद्रबाबू द्वारा दिए जाने वाले भाषण और क्षेत्रीय स्तर पर चल रहे उनके शासन में काफी फर्क है। अपने काले धंधों के लिये कलेक्टर जैसे उच्चाधिकारियों का इस्तेमाल कर अखिल भारतीय सेवा की महत्ता को गिरा रहे हैं चंद्रबाबू। पूरा जिला टीडीपी को सौंपने वाले लोग अब उसी का सजा भुगत रहे हैं।

मुख्यमंत्रीजी मेरा एक सवाल है... आपकी पार्टी के हितों और आपके नेताओं के भ्रष्टाचार, धोखाधड़ियों को जारी रखने के लिए मनमाने ढंग से प्रशासनिक व्यवस्थाओं का इस्तेमाल करते हुए उन्हें बर्बाद करने की बात में क्या सच्चाई नहीं है? आपकी धांधलियों व काले धंधों में लोगों व संविधान के जिम्मेदार कहे जाने अधिकारियों को उपयोगी साधनों की तरह इस्तेमाल करना क्या संवैधानिक व्यवस्था का गलत इस्तेमाल करना नहीं है?

वाईएस जगन