लखनऊ: अदालती आदेश के बाद काफी ना नुकुर और हील हुज्जत के बाद यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने सरकारी बंग्ला खाली कर दिया। हालांकि बुझे मन से मायावती ने कांशीराम की यादों को अलविदा कहा। बसपा सुप्रीमो ने पार्टी संस्थापक और दलित नेता कांशीराम के इसी सरकारी निवास पर राजनीति की दीक्षा ली थी। साथ ही सियासी दांव पेंच के कई खेल यहीं गढ़े गए थे। ऐसे में मायावती के लिए एक झटके में इन यादों से दूर होना किसी सदमे से कम नहीं है।

मायावती अब सरकारी बंग्ला छोड़ एक निजी परिसर में शिफ्ट हो गई हैं। हालांकि मायावती ने दिवंगत नेता कांशीराम से जुड़ी चीजों को सरकारी बंग्ले में ही छोड़ दिया। वहीं घर खाली करते करते बीजेपी के सियासी पतन की बददुआ दे गई बसपा सुप्रीमो। मायावती ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि इनकी उल्टी गिनती शुरू हो गई है। इस दौरान मयावती ने कैराना और नूरपुर की जनता के फैसले की सराहना की।

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बता दें कि इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी लखनऊ का सरकारी बंगला छोड़ दिया है। अखिलेश परिवार के साथ वीवीआईपी गेस्ट में शिफ्ट हुए हैं। पत्नी डिंपल यादव के साथ 4 विक्रमादित्य मार्ग स्थित सरकारी बंगला से निकलते अखिलेश भी अनमने नजर आए। फिलहाल अखिलेश यादव राज्य संपत्ति विभाग के अधीन वीवीआईपी गेस्ट हाउस में ठहरे हुए हैं। पूरा सामान गेस्ट हाउस के चार कमरों में रखवाया गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उत्तर प्रदेश के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों ने अपना सरकारी बंग्ला खाली कर दिया है। आदेश की तामील करने का आज आखिरी दिन था।