नई दिल्ली: वित्तवर्ष 2017-18 की चौथी तिमाही में देश की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) दर 7.7 फीसदी रही। ये आधिकारिक आंकड़े गुरुवार को जारी किए गए।

बयान में कहा गया कि वित्तवर्ष 2017-18 के लिए राष्ट्रीय आय का अनंतिम अनुमान 6.7 फीसदी लगाया गया है। इसी वित्तवर्ष की तीसरी तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर 7 फीसदी थी।

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया, "वित्तवर्ष 2011-12 की कीमतों को आधार वर्ष मानते हुए, वित्तवर्ष 2017-18 की चौथी तिमाही में जीडीपी की विकास दर 7.7 फीसदी दर्ज की गई, जबकि पहली, दूसरी और तीसरी तिमाही में क्रमश: 5.6 फीसदी, 6.3 फीसदी और 7 फीसदी रही थी। इसमें कृषि (4.5 फीसदी), विनिर्माण (9.1 फीसदी) और निर्माण (11.5 फीसदी) क्षेत्र में हुई तेज वृद्धि का प्रमुख योगदान रहा।"

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भले ही आज उपचुनाव के नतीजों में बीजेपी को करारी शिकस्त मिली हो। लेकिन अर्थव्यवस्था के इस रिजल्ट को बीजेपी राजनीतिक तौर पर भी भुनाने से पीछे नहीं हटेगी।

गुरुवार शाम को ही सरकार ने जीडीपी से संबंधित आंकड़े जारी किए। जिसके मुताबिक मुताबिक फाइनैंशल इयर 2016-17 की जुलाई-सितंबर तिमाही के बाद यह सबसे उम्दा रिजल्ट रहा है।

बता दें कि सरकार ने 2016-17 की जुलाई-सितंबर तिमाही के बाद ही देश में 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों के प्रचलन को खत्म कर दिया था। जिसके बाद से आर्थिक सुधार के आंकड़ों पर नकारात्मक असर देखने को मिला। इसको लेकर सरकार के नोटबंदी के फैसले पर उंगली भी उठती रही है।

मजे की बात ये कि रॉयटर्स के पोल में अर्थशास्त्रियों ने 7.3 पर्सेंट की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान लगाया था। उम्मीद से कहीं बेहतर आर्थिक नतीजों ने शेयर बाजार को भी उत्साहित किया है। नोटबंदी और जीएसटी की मार से परेशान देश की अर्थव्यवस्था अब बेहतर नतीजे देने की स्थिति में आ गई है।