15.05.2018, मंगलवार

जोगन्नापालेम क्रॉस, पश्चिमी गोदावरी जिला

आज मेरे सामने एक घटना घटी...रिश्तेदारी नहीं होने के बाद भी अपनी एक अलग पहचान बनाने वाले व्यक्ति के प्रति रिश्तेदारी और प्यार कितना मजबूत हो जाता है, इसका मुझे अहसास हुआ। एक वृद्ध महिला अपनी पोती के साथ मेरे पास पहुंची और बोली, 'अन्ना, मेरा पति जिन्दगी और मौत से लड़ रहा है।

उसकी बात सुनकर मैंने उसके पिता से मिलने का मन बनाया। सड़क से दूर एक गली के किनारे बने उस वृद्धा के घर में कदम रखते ही...सामने दीवार पर जो नजारा दिखा उसे देखकर मेरे होश उड़ गए। भगवानों के फोटो के बीच 'पिताजी' का फोटो लगा था। अपने दिलों में उन्होंने पिता के लिये जो जगह दी है, उसे मेरा दिल हिल गया।

लोगों के दिलों में बसे हैं वाईएसआर

बुढ़ापे की वजह से चारपाई पर सोए हुए घर के मुखिया कठारी रामुलू की मैं ने मिजाजपुर्सी की। मुझे देखते ही इस वृद्ध के चहरे पर मुस्कुराहट दिखी और उसने मेरा हाथ पकड़ लिया। कठारी रामुलू को पिताजी के प्रति इतना सम्मान और प्यार था कि पिताजी के आकस्किम निधन की खबर सुनकर बर्दाश्त नहीं कर पाने के कारण ट्रेन से कटकर आत्महत्या करने के लिये भी तैयार हुआ था। सौभाग्यवश आस-पास के लोगों ने समय रहते उसे बचा लिया।

रामुलू की बहू ने कहा कि स्वास्थ्य ठीक नहीं होने से पिछले छह महीनों से बिस्तर तक सीमित रहने वाले मेरे सासूरजी की आंखों में हम आज खुशी देख रहे हैं और उन्हें ऐसा देखकर हमारे दिल को काफी ठंडक मिली। मर जाने के बाद भी इस तरह करोड़ लोगों के दिलों में जगह बनाए रखने से बढ़ी सार्थकता क्या हो सकती है।

वाईएस जगन को वोट देने पर हटाया गया राशन कार्ड

तिरुपति राव नामक भाई ने कहा, 'अन्ना... हमारे पिता को 70 वर्ष हैं। पेंशन नहीं मिलने पर उसने आवेदन किया। कुछ दिनों बाद ही एक फोन आया और पूछा गया कि क्या आपने पेंशन के लिए आवेदन किया है। बाद में यह भी पूछा गया कि आपने पिछले चुनाव में किस पार्टी को वोट दिया था। जब हमने अपना वोट वाईएस जगन को देने की बात बताई तो उसके एक सप्ताह के भीतर हमारा राशन कार्ड भी हटा दिया गया। इससे हमारा गुजारा मुश्किल हो गया है। पेंशन देने की अपील करने पर हमारा चावल का कोटा भी खत्म कर दिया गया। फसलों के लिये उर्वरकों की आपूर्ति तक नहीं हो पाने से हमारी स्थिति दिनों-दिन खराब बनती जा रही है।

मुझसे मिले सरपंचों ने कहा, 'अन्ना,... केवल नामके लिये हम सरपंच है...पूरी तरह से उत्सवों की मूर्तियां बनकर रह गए हैं। हमारे हाथ में कोई अधिकार नहीं है। काम करने पर बिलों का भुगतान नहीं होता। एक विधवा को पेंशन तक नहीं दिलाने वाले असहाय सरपंच बन चुके हैं। पांच महीनों से कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है। हमारे गांव के माइनर पंचायतों की बदतर स्थिति का हवाला देते हुए हम ग्राम पंचायत कार्यालयों के बिजली बिल तक नहीं चुका पा रहे हैं। टीडीपी के शासनकाल में पंचायतीराज व्यवस्था पूरी तरह से निष्क्रिय हो चुकी है। गौर करने वाली बात ये है कि मुख्य्मंत्री के बेटे को जब से यह मंत्रालय सौंपा गया है तब से स्थिति और भी बदतर हो गई है।

राज्य में बालिकाएं और महिलाएं उसुरक्षित

दो वर्षीय अपनी बेटी को गोद में लेकर एक महिला बेटी को बचाओ लिखी हुई तख्ती लेकर खड़ी थी। परमज्योति नाम की बहन को देखकर स्पष्ट हो जाता है कि आज के शासनकाल में बालिकाओं व महिलाएं राज्य में बढ़ती असुरक्षा को लेकर काफी चिंतित और भयभीत हैं।

मुख्यमंत्रीजी मेरे एक सवाल है.... पंचायतीराज व्यवस्था को मजबूत बनाने की बात टीडीपी के चुनावी घोषणा पत्र में शामिल की गई। समयसीमा खत्म होने की दशा में मौजूद पंचायतें अगर कर्मचारियों के वेतन और बिजली बिलों का भुगतान तक नहीं करने की स्थिति में हैं तो इसके लिये क्या आप जिम्मेदार नहीं है? संवैधानिक अधिकारों के हस्तांतरण का आश्वासन देकर गैर संवैधानिक ताकतों जन्मभूमि कमेटियों को सभी अधिकार सौंपे जाना विश्वासघात नहीं तो क्या है?

वाईएस जगन