13.05.2018, रविवार

महेश्वरपुरम, पश्चिमी गोदावरी जिला

'मेरा बेटा अपनी बात से नहीं मुकरता...जन कल्याण के अपने रास्ते से पीछे मुड़कर नहीं देखेगा... अपने पिता की तरह जुनून वाला व्यक्ति है...हर व्यक्त लोगों के बारे में सोचने का दिल रखने वाला मनुष्य है।' मां को अकसर मेरे बारे में इस तरह बोलते हुए गुजरे दिनों की यादें आज फिर ताजा हो गईं। आज मैं जिस तरह कदम आगे बढ़ा रहा हूं, उसके पीछे मां का आशीर्वाद ही तो है।

पदयात्रा 2000 किलो मीटर की दूरी तय करने के मौके पर रास्ते में मुझसे मिलकर अपनी परेशानियां सुना चुकी सभी मां याद आईं। अपने बच्चों की तरह मेरा आदर करते हुए कदम कदम पर प्यार बांटते हुए कभी नहीं भुला देने वाली ममता की यादें दिलाने वाली हर मां के चरणों में मेरा प्रणाम। मन ही मन उन सभी मां को मदर्स डे पर शुभकामनाएं देकर मैं ने आज की पदयात्रा शुरू की।

पीने का पानी नहीं होने से हो रही परेशानी, रोजगार गंवा चुके मछुआरों की समस्याओं के बीच आज मेरी पदयात्रा आगे बढ़ी। दुर्गंध और प्रदूषित पानी बोतलों में भरकर लाए हुए लोगों ने कहा, ' साहब ये पानी कैसे पीएंगे ? इसे हमारी बदकिस्मती बताते हुए देय्यमपाडु गांव की महिलाओं ने अपना दुखड़ा सुनाया। केनालों के जरिए पानी की आपूर्ति नहीं होती और बोरवेल डालेंगे तो खारा पानी आता है। गला सूखते देख भी हम दो बूंद पानी नहीं पी सकते। जिस दिन हमें पीने का शुद्ध पानी मिलेगा वह दिन हमारे लिये त्यौहार होगा।

प्रदूषित पानी पीने को मजबूर कोल्लेटी क्षेत्र के लोग

लोगों ने कहा, 'यह प्रदूषित पानी पीकर हम रक्तचाप, गुर्दा संबंधी रोग तथा चर्मरोग के शिकार हो रहे हैं।' वहां से कुछ कदम आगे बढ़ने पर बच्चों को गोद में लिए हुई चार-पांच बहनें मुझे देखते ही रो पड़ीं। वह बोलीं, 'अन्ना, कोल्लेरु की दयनीय स्थिति के साथ ही हमारी जिन्दगियां भी बरबाद हो गई हैं। हमारे बच्चों की जिन्दगी हमारी तरह नहीं होनी चाहिए।' उनमें से एक बहन ने कहा,' अन्ना, मैं अच्छी खासी पढ़ी-लिखी हूं। कोल्लेटी की समस्या के कारण मेरे लिये परेशानियां खड़ी हो गई हैं।

यहां के शासकों की उदासीनता की वजह से हमारी जिन्दगियां बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं। मुझे और नहीं पढ़ा पाने के कारण कम उम्र में ही मेरी शादी करा दी गई। उच्च शिक्षा हासिल करने की आस भी कोल्लेरु की तरह सूख गई।' विश्व विख्यात पेयजल झील इलाके में रहने के बावजूद एक बूंद पीने का पानी नहीं मिलना दुर्भाग्य की बात है। उन्हें पीने का पानी तक मुहैया कराने में शासकों की उदासीनता नामाफी के काबिल अपराध है।

रास्ते में मिले मछुआरों ने कहा, 'एक समय था जब कोल्लेरू झील हमारी जिन्दगी संवारने वाली मां की तरह थी। इस गंगा की गोद में मछलियों का शिकार कर सुखी जीवन बिता रहे थे। हजारों मीलों से यहां विदेशी पक्षी यहां आते हैं। परंतु आज रोजीरोटी के लिये यहां के मछुआरों को दूर-दराज के क्षेत्रों में जाना पड़ रहा है। हमारी जिन्दगी तभी फिर से सुधर सकती है जब आप जैसे सशक्त और जनता के मारे में सोचने वाले नेता सत्ता में आएंगे और हम उसी दिन का बेसबरी से इंतजार कर रहे हैं।' उनकी दयनीय स्थिति देखने के बाद उनके जीवन में बदलाव लाने का मेरा संकल्प और मजबूत हुआ।

परियोजना के लिए अपनी मां जैसे गांवों तक छोड़ देने वाले विस्थापितों और मासूम आदिवासियों ने बताया कि राज्य के लिये वरदान साबित होने वाली पोलावरम परियोजना को चंद्रबाबू नायडू ने भ्रष्टाचार का अड्डा बनाने के अलावा हमारे लिये एक अभिशाप जैसा बना दिया है। 14 अप्रैल को कृष्णम्मा नदी पर भारी भीड़ के साथ कृष्णा जिले में शुरू हुई प्रजा संकल्प यात्रक्षा आज उसी जनता के समर्थन से कोल्लेरू ब्रिज के रास्ते पश्चिमी गोदावरी जिले में प्रवेश कर गई।

मुख्यमंत्री जी मेरा एक सवाल है... पट्टीसीमा से रायलसीमा को पानी देने को लेकर आप खुद का प्रचार कर रहे हैं, लेकिन बगल में स्थित कोल्लेटी क्षेत्र के लोगों को पेयजल मुहैया नहीं कराना क्या आपकी असर्थता नहीं है? पट्टीसीमा में पानी का भंडारण नहीं होने और प्रकाशम बैरेज से समुद्र में पानी छोड़ने की बात में क्या सच्चाई नहीं है? क्या इनसबके जिम्मेदार आप नहीं है?

वाईएस जगन