ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या को न्याय के देवता शनि महाराज की जयंती मनायी जाती है। हिन्दू पंचांग के अनुसार इस साल शनि जयंती 15 मई मंगलवार को पड़ रही है। ज्योतिष व धर्म के जानकारों का मानना है कि इस बार शनि जयंती के दिन सर्वार्थसिद्धि योग बन रहा है।

ऐसे में शनि जन्मोत्सव का आयोजन व विशेष पूजा का उन लोगों के लिए खास महत्व होगा, जो शनि की साढ़ेसाती, शनि के ढैया या जन्मकुंडली में शनि की महादशा या शनि की खराब स्थिति से प्रभावित हैं। ऐसे लोग शनि जयंती पर शनि को प्रसन्न करने के उपाय करके अपनी सभी परेशानी से मुक्ति पा सकते हैं।

शनि जयंती के दिन भारत में स्थित प्रमुख शनि मंदिरों में भक्त शनि देव से संबंधित पूजा पाठ करते हैं तथा शनि पीड़ा से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं। शनि देव को काला या कृष्ण वर्ण का बताया जाता है इसलिए इन्हें काला रंग अधिक प्रिय है। शनि देव काले वस्त्रों में सुशोभित हैं।

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हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार जन्म के समय से ही शनि देव श्याम वर्ण, लंबे शरीर, बड़ी आंखों वाले और बड़े केशों वाले थे। यह न्याय के देवता हैं। योगी, तपस्या में लीन और हमेशा दूसरों की सहायता करने वाले होते हैं।

शनि हिन्दू ज्योतिष में नौ मुख्य ग्रहों में से एक हैं। शनि अन्य ग्रहों की तुलना मे धीमे चलते हैं इसलिए इन्हें शनैश्चर भी कहा जाता है। ज्येष्ठ अमावस्या को मनाई जाने वाली शनि जयंती में शनि देव की विशेष पूजा का विधान है और इस दिन उन्हें मंत्रों व स्तोत्रों का गुणगान करके खुश किया जा सकता है।

शनि देव
शनि देव

ऐसे हुआ था शनि का जन्म

शनि महाराज के जन्म के संदर्भ में एक पौराणिक कथा बहुत मान्य है जिसके अनुसार शनि, सूर्य देव और उनकी पत्नी छाया के पुत्र हैं। सूर्य देव का विवाह संज्ञा से हुआ था। कुछ समय पश्चात उन्हें तीन संतानों के रूप में मनु, यम और यमुना की प्राप्ति हुई। इस प्रकार कुछ समय तो संज्ञा ने सूर्य के साथ निर्वाह किया परंतु संज्ञा सूर्य के तेज को अधिक समय तक सहन नहीं कर पाईं। उनके लिए सूर्य का तेज सहन कर पाना मुश्किल होता जा रहा था। इसी वजह से संज्ञा ने अपनी छाया को पति सूर्य की सेवा में छोड़ कर वहां से चली चली गईं। कुछ समय बाद छाया के गर्भ से शनि देव का जन्म हुआ।

शनि जयंती पूजा

कहा जाता है कि शनि जयंती के अवसर पर सुबह जल्दी से स्नान आदि से निवृत्त होकर नवग्रहों को नमस्कार करते हुए शनिदेव की लोहे की मूर्ति स्थापित करें और उसे सरसों या तिल के तेल से स्नान कराएं तथा षोड्शोपचार पूजन करें। उसके साथ ही शनि मंत्र का उच्चारण करें..

ॐ शनिश्चराय नम:।।

इसके साथ ही साथ ही दिन में शनि के वैदिक तथा बीज मंत्र 'ऊं खां खीं खूं सः मंदाय स्वाहाः' का 21 माला जाप करें।

सुबह शनि पूजन के बाद दिन भर निराहार रहें व दिनभर यथा समय शनि मंत्र का जप करने की कोशिश करें। शनि देव को प्रसन्न करने के लिए हनुमान जी की भी पूजा कर सकते हैं।

इन वस्तुओं का करें दान

शनि महाराज की पूजा के बाद पूजा सामग्री सहित शनिदेव से संबंधित वस्तुओं का दान किया जाता है। शनि की कृपा एवं शांति प्राप्ति हेतु तिल, उड़द, कालीमिर्च, मूंगफली का तेल, आचार, लौंग, तेजपत्ता तथा काले नमक का उपयोग करना चाहिए। शनि के लिए दान में दी जाने वाली वस्तुओं में काले कपडे, जामुन, काली उड़द, काले जूते, तिल, लोहा, तेल आदि वस्तुओं को शनि के निमित्त दान में दे सकते हैं।

यह है शुभ मुहूर्त

शनि जयंती तिथि - 15 मई 2018

अमावस्या तिथि आरंभ - 19:46 बजे (14 मई 2018)

अमावस्या तिथि समाप्त - 17:17 बजे (15 मई 2018)

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