आगरा : अंधड़ और बारिश में 100 से ज्यादा लोग मारे गए , मकान ढह गए और फसलें तबाह हो गयीं , लेकिन यह तबाही सिर्फ इतनी ही नहीं है। तबाही उन परिवारों में मची है जिनका बेटा मर गया है , जिनका तिनका - तिनका जोड़कर बनाया गया मकान भर - भरा कर गिर गया है, जिनकी फसलें बर्बाद हो गयी हैं। उत्तर प्रदेश और राजस्थान में दो मई को 100 से ज्यादा लोगों की जान लेने वाले अंधड़ ने अकेले आगरा में 40 से ज्यादा लोगों की जीवन लीला समाप्त कर दी है।

आगरा के गांवों में घुसते ही चहुं ओर वहां पसरा हुआ सन्नाटा दिख रहा है। एक बाप सूनी आंखों से मकान का मलबा देख रहा है जिसने उसके जवान बेटे और भतीजे को निगल लिया है। वहीं कोई मकान और फसलें गंवाने के बावजूद भगवान को धन्यवाद दे रहा है कि ‘‘ शुक्र है तेरा , मेरा परिवार सलामत है।

''सबसे ज्यादा तबाही झेलने वाले गांवों में से एक महुआखेड़ा के राम भरोसे को अभी तक यकीन नहीं हो रहा है कि उन्होंने बिदाई तो बेटी की की थी, फिर उनका जवान बेटा और भतीजा साथ छोड़कर क्यों चले गए । बेटी की बिदाई के अगले दिन दो मई की अंधड़ में राम भरोसे का बेटा सुनील कुमार (20) और गौतम सिंह (22) मकान के मलबे के नीचे दब कर मर गये।

चार बहनों के बीच में अकेले भाई सुनील पर परिवार की रोजी - रोटी कमाने और बूढ़े मां - बाप के साथ एक छोटे बच्चे की भी जिम्मेदारी थी। लेकिन , अब सबकुछ सुना पड़ा है। अब बूढ़े बाप को समझ नहीं आ रहा है कि आगे की जिन्दगी कैसे कटेगी। राम भरोसे के भाई उदयवीर ने पीटीआई से बातचीत के दौरान बताया कि गौतम बहन की शादी के लिए आया था। अंधड़ वाले दिन वह बाहर पड़ी खाट को भीगने से बचाने के लिए अंदर लेकर गया और फिर कभी नहीं लौटा।

प्रभावित गांव के लोगों से मिलने पहुंचे उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने मृतकों के परिवारों को पूरी मदद का वादा किया है। उन्होंने कहा कि पूरी माली मदद की जाएगी। एसडीएम ने उन्हें आठ लाख रुपये का चेक दे दिया है। फसलों और मकान को पहुंचे नुकसान के लिए भी मदद की जाएगी। पड़ोसी गांव बुरेरा में भी लोगों की हालत इससे कुछ बेहतर नहीं है।

वहां एक परिवार अपने दो मासूस बच्चों की मौत का मातम कर रहा है। वहीं भगवान से अस्पताल में भर्ती परिवार के अन्य लोगों की सलामती की दुआ भी कर रहा है। उस दिन के भयावक मंजर को याद करके , सिहरते हुए गांव के लोगों ने बताया कि अभी - अभी तो आसमान एकदम साफ था। सबकुछ ठीक था। और कुछ ही देर में अंधड़ आया , चारों ओर अंधेरा , पेड़ उखड़ गये , ट्रांसफॉमर्र गिर गये और बिजली के खंभे गिर गये। हमने पहले ऐसा कुछ नहीं देखा है।

लेकिन इस भयानक हादसे में काफी कुछ गंवाने के बावजूद कुछ लोग भगवान का धन्यवाद कर रहे हैं क्योंकि उनका परिवार सही - सलामत है। उन्हें किसी परिजन के मरने का शोक नहीं मनाना पड़ रहा है। आगरा के पास ही मजदूरी करने वाले चन्द्रभान ने बताया कि कैसे उसने पत्नी किरन के साथ मिलकर मकान के मलबे से अपनी छह साल की बेटी दिव्यांशी को बचाया।

फिलहाल दिव्यांशी और उसके दो बड़े भाइयों दिव्यांश और आशु का आगरा के सरोजनी नायडू मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है। दिव्यांशी के पूरे शरीर में चोट आयी है जबकि दिव्यांश को सिर में और आशु के हाथ की हड्डी टूट गयी है। हालांकि चन्द्रभान का मकान ढह गया है , उसमें रखी सभी चीजें बर्बाद हो गयीं हैं , उसके पास कुछ भी नहीं बचा। फिर भी वह परिवार को सलामत देख कर ऊपर वाले को शुक्रिया बोल रहा है।