15.04.2018, रविवार

मुत्यालपाडु क्रॉस, कृष्णा जिला

आज की पदयात्रा के दौरान दो बच्चियों की दर्दभरी कहानी सुनकर मेरा दिलभर आया। विजयवाड़ा के चिट्टीनगर की रहने वाली रमा देवी और श्रावणी नाम की दो बालिकाएं कोत्तूर ताड़ेपल्ली के पास मुझसे मिलीं और बोली, ' अन्ना... मेरे पिताजी रोज शराब पीकर घर पहुंचते हैं और हमें और हमारी मां की पिटाई करते हैं। हमारे प्रति हर दिन गालीगलौज के साथ पेश आते हैं। घर खर्च के लिये छिपाकर रखे हुए पैसे भी छीन ले जाते हैं।

यही नहीं... हमारे स्कूल के पास पहुंच कर झगड़ा कर रहे हैं। हमारे पिताजी शराबी हैं, इसलिए स्कूल में कोई हमसे बात भी नहीं करता।' उन मासूम बच्चियों की आंखों में आंसू देखकर मुझे काफी दुख हुआ। अपराध न उन बच्चियों की है और ना ही उनके पिता की। गलती तो पास रहकर शराब को प्रोत्साहित करते हुए लोगों को शराब की आदत डालकर उससे मिलने वाली आय के नशे में झूम रही चंद्रबाबू सरकार की है।

वेमवरम गांव में सड़क के किनारे मिट्टी के घड़े बना रहे एक बच्चे को देखकर मैं रुक गया। 12 साल की उम्र में काम पर लगे पवन कुमार की पढ़ाई के बारे में उसकी मां से जानने की कोशिश की। बच्चे की मां ने कहा,' स्कूल जा तो रहा है, लेकिन कितनी भी पढ़ाई करने के बाद नौकरी मिलने की स्थिति नहीं है। इसीलिए यह काम सिखाने पर कल किसी तरह अपना गुजारा कर लेगा।' मैं ने उस महिला से कहा हर दिन एक जैसा नहीं होता, अच्छे दिन आ जाएंगे... बच्चे को अच्छा पढ़ाना चाहिए।

कुम्हारों के लिये मिट्टी पर प्रतिबंध

कई लोगों ने बताया कि इस गांव में कुम्हारी पेशे पर आधारित करीब सौ से अधिक परिवार बड़े मुश्किल से अपना गुजारा कर रहे हैं। मिट्टी और रेत माफियाओं के जरिए राज्य को लूट रहे सरकार में बैठे बड़े लोगों का कुम्हारों को दी जाने वाली मिट्टी पर प्रतिबंध लगाना दुर्भाग्य की बात है। तेलुगु अकादमी के लोग मुझसे मिले। उन्होंने बताया कि राज्य के विभाजन के बाद अकादमी के विभाजन की अनदेखी करने वाले सरकार में बैठे बड़े लोगों ने कमिशन के लालच में पुस्तकों से संबंधित करोड़ों रुपये की प्रिंटिंग का ठेक निजी संस्थाओं को सौंपी है। यहां सब उन्ही की मर्जी पर चल रहा है।

वे जब पुस्कतें देंगे तभी लेने होंगे। शिक्षण वर्ष आधे से अधिक खत्म होने के बावजूद पुस्तकों का वितरण नहीं होना और विद्यार्थियों का परेशान होना यहां आम बात बन गई है। राज्य की दो बड़े कार्पोरेट शिक्षण संस्थान तो नियमों का उल्लंघन करते हुए खुद पाठ्यपुस्तक प्रिंट करवा कर विद्यार्थियों को सौंप रहे हैं। वर्ष 2010 में इसी तरह नियमों को ताक पर रखते हुए कॉपी राइट कानून का उल्लंघन कर पाठ्य पुस्तकें प्रिंट करवा कर विद्यार्थियों में बेचे जाने पर लोगों द्वारा नारायणा शिक्षण संस्थान के प्रमुख नारायणा के विरुद्ध मामला दर्ज करने और पुलिस हिरासत में उनसे की गई पूछताछ से संबंधित पेपर कटिंग भी दिखाए गए।

कई लोगों ने कहा कि इस सरकार के रवैये की वजह से उनकी नौकरी भी चले जाने का खतरा मंडरा रहा है। ये सरकार जो भी करती है उसके पीछे स्वार्थ, राजनीतिक हित या फिर बदले की भावना होती है और जनकल्याण को लेकर उसे कोई रुचि नहीं है। विशेष दर्जे के लिये पूरे राज्य के लोग एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करते हुए इसके लिए कोई भी कुर्बानी देने को तैयार हैं। पांच करोड़ आंध्रवासियों की आकांक्षाओं की बुलंद आवाज देशवासियों तक पहुंचाने के लिए आज आहूत बंद को शांतिपूर्वक सफल बनाएंगे।

मुख्यमंत्री जी मेरा एक सवाल है... विशेष दर्जे को लेकर जारी आंदोलन पर पानी फेरने का प्रयास करने की बात क्या सहीं नहीं है ? आपके सांसदों से इस्तीफा दिलवा कर आमरण अनशन तो नहीं करवाया.. लेकिन विशेष दर्जे की मांग को लेकर आहूत बंद को पहले से बेकार बताना, बंद में भाग लेने वाले नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी देना और पुलिस के जरिए उन्हें नोटिस भिजवाना तथा खुद को बंद से दूर रखने के आपकी पार्टी का एलान इस आंदोलन पर पानी फेरना नहीं तो क्या है ? मुख्यमंत्री के तौर पर आगे रहकर आंदोलन चलाने के बजाय आपका संघर्षरत विपक्ष, जनसंगठनों तथा लोगों की पीठ में छुरा घौंपना कहां का इंसाफ है ?

वाईएस जगन