14.04.2018, शनिवार

चनमोलु वेंकटराव फ्लाई ओवर, कृष्णा जिला

सामाजिक असमानता और जातिवाद को समाप्त करने के लिये सामाजिक सुधार और सशक्त संविधान की रक्षा, दलित व गरीब की उन्नति के लिये इमानदारी और निष्ठा से काम करने वाले शासकों की जरूरत पर बल देने वाले डॉक्टर बाबा साहेब आंबेडकर की जयंती पर श्रृद्धांजलि अर्पित कर मैंने अपनी पदयात्रा शुरू की। दुर्भाग्य की बात है कि हमारे राज्य में वर्तमान में उस महापुरष की आकांक्षाओं के विरुद्ध शासन चल रहा है।

राज्य के इतिहास में दलितों पर हमले और ज्यादतियां अत्यधिक होने वाला अगर कोई शासन है तो वह चंद्रबाबू नायडू का है। क्या कोई दलित परिवार में जन्म लेना चाहता है ...बाबू की यह बात सुनकर ही समझ लेना चाहिए कि दलितों के प्रति उनकी विचारधारा कैसी है। अपने सहयोगी मंत्री के दलितों के प्रति अत्यंत अपमानजनक बयान के बावजूद चंद्रबाबू नायडू चुप्पी साधे रहे।

दलितों के प्रति टीडीपी नेताओं की ज्यादतियां

अपनी पार्टी के नेताओं के दलित महिलाओं को निर्वस्त्र कर हमला करने के बाद भी बाबू धृतराष्ट्र की भांति आंखे मूंद करके आरोपियों की बचाव करते दिख रहे हैं। दलितों को चाहे अपनी जमीन देने की इच्छा हो या ना हो, जबरन उनकी जमीनें छीन लेना और मुआवजा भी अन्य लोगों की तुलना में कम देकर चंद्रबाबू दलितों के साथ अन्याय करते रहे हैं।

गुंटूर जिले में पदयात्रा के दौरान ऐसा एक दिन नहीं था जिस दिन दलितों ने तेलुगु देशम पार्टी के नेताओं की अराजकता के खिलाफ शिकायत नहीं की हो। आज के साथ ही गुंटूर जिले में पदयात्रा समाप्त हो गई। एक बार उस जिले में पदयात्रा की यादें ताजा हो गईं। बगल में कृष्णा बहने के बाद भी पानी नहीं मिलना, फसलों को सही कीमत नहीं मिलने के अलावा टीडीपी के दलालों की लूटमार से परेशान कपास, मिर्ची, मकई, हल्दी, अरहर आदि किसानों की दर्दभरी कहानियां कभी नहीं भूलने वाला कड़वा सच है।

रेत और मिट्टी माफियाओं की तरह लूट, कपास खरीदी में सीसीआई के घोटाले, राशन के चावल में घपले, नीरु-चेट्टू, राजधानी का निर्माण आदि बड़े घोटाले मेरे दिमाग में आए। वक्फ बोर्ड, गिरीजाघरों की संपत्तियां, मंदिरों की जमीनों, दलितों की भूमि, सदवर्ती जमीन आखिर में नदियों पर भी अतिक्रमण कर किस तरह राज्य में किस तरह से लूट मची है ये सारी बातें मुझे याद आईं।

मेरा स्वागत करने पहुंचे विजयवाड़ा के हजारों लोगों के बीच मेरी पदयात्रा कनकदुर्गम्मा ब्रिज से गुजरी। ब्रिज पर पदयात्रा के दौरान चंद्रबाबू सरकार की अवैध कमाई के चलते हुई नाव दुर्घटना में 23 लोगों के मारे जाने की घटना याद आई। दुर्घटना के पीछे रहे असली गुनेहगारों को छोड़कर आम लोगों को बलि का बकरा बनाया गया था।

बाबू के शासन में मंदिर भी सुरक्षित नहीं...

सामने इंद्रकिलाद्री पहाड़ी पर दुर्गम्मा मंदिर को देखते ही बाबू सरकार में हर बार उस मंदिर में हो रहे अपवित्र काम याद आए। इससे पहले बाबू के शासनकाल में भक्तों द्वारा अत्यंत पवित्र माने जाने वाले देवी का मुकुट चोरी हुई थी। हाल ही में मंदिर परिसर में तंत्र-मंत्र कराने की घटना सामाने आई थी। लोगों के प्रति प्रेम, भगवान के प्रति विश्वास, पाप का डर नहीं रहने वाले बेदर्द इंसान के शासन में लोगों के सुख और संतोष की कल्पना कैसे की जा सकती है ? करोड़ों रुपये स्वाह करते हुए संतोष नगर के नाम पर सभाओं का आयोजन करना धोखा नहीं तो और क्या है?

मुख्यमंत्री जी मेरा एक सवाल है .... दलितों पर हो रहे अत्याचार का आप खुलेआम समर्थन कर रहे हैं, लेकिन अब चुनाव से ठीक एक साल पहले दलित तेजम के नाम पर कार्यक्रमों का आयोजन करना क्या ये आपका कपट प्रेम नहीं है ? प्रति दिन संविधान और आंबेडकर की आशाओं पर पानी फेरने में लगे आपको क्या उस महापुरुष को श्रृद्धांजलि अर्पित करने की योग्यता है ?

वाईएस जगन