नई दिल्ली: भारत सहित दुनियाभर के कई देशों में बेबी केयर प्रोडक्ट्स में जॉन्सन एंड जॉन्सन का दबदबा रहा है। ये कंपनी फिलहाल विवादों में है और अमेरिकी अदालत ने इस पर 760 करोड़ का जुर्माना ठोंक दिया है।

दरअसल अमेरिका के न्यूजर्सी के रहने वाले स्टीफन लैंजो और उनकी पत्नी केंड्रा ने कंपनी पर सनसनीखेज आरोप लगाते हुए केस कर दिया था। आरोपों के मुताबिक जॉन्सन एंड जॉन्सन पाउडर इस्तेमाल करने से उन्हें मेसोथेलियोमा नामक बीमारी हो गई। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि जॉन्सन एंड जॉन्सन पाउडर में एसबेस्टस होने की वजह से उन्हें ये बीमारी हुई है। लिहाजा दंपत्ति ने कंपनी पर मुआवजे के लिए दावा ठोंका। स्टीफन दंपत्ति ये केस जीत गई है और अब दुनियाभर के लोग जॉन्सन एंड जॉन्सन को शक की निगाह से देख रहे हैं।

यहां हम मेसोथेलियोमा नाम की जिस बीमारी का जिक्र कर रहे हैं वो एक तरह का कैंसर है। इससे पीड़ित व्यक्ति ऊतक, फेफड़ों, पेट, दिल और शरीर के विभिन्न अंगों में खास तरह की तकलीफों का शिकार हो जाता है।

हालांकि जॉन्सन एंड जॉन्सन कंपनी के उत्पादन का 120 सालों का इतिहास रहा है। कंपनी के पाउडर से मेसोथेलियोमा होने का यह पहला मामला सामने आया है। याचिकाकर्ता स्टीफन ने दलील दी कि बीते तीस सालों से वे जॉन्सन एंड जॉन्सन पाउडर इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसके चलते उन्हें ये बीमारी हुई।

वहीं जॉन्सन एंड जॉन्सन कंपनी ने अपनी तरफ से तमाम दलीलें दी हैं। कंपनी ने कहा कि याचिकाकर्ता जिस घर में रहते हैं उसमें एस्बेस्टस का इस्तेमाल हुआ है। वहीं स्टीफन जिस स्कूल में पढ़ते थे वहां भी एस्बेस्टस लगा था। हालांकि जॉन्सन एंड जॉन्सन कंपनी की दलीलों को कोर्ट ने खारिज कर दिया।

भारत के संदर्भ में अमेरिकी कोर्ट के फैसले से जॉन्सन एंड जॉन्सन के कारोबार में असर की संभावना जताई जा रही है। भारत सरकार की विभिन्न एजेंसियां इस ब्रांड को लेकर सतर्क है। हो सकता है देश में इस प्रोडक्ट की गुणवत्ता की जांच की जाय और सरकार इस बारे में कोई दिशानिर्देश जारी कर दे।

भारत में इससे पहले भी कई ब्रांडेड प्रोडक्ट्स की गुणवत्ता को लेकर विवाद हो चुका है। इससे मैगी को लेकर जोरदार हंगामा हुआ था, जिसके बाद कई महीनों तक मैगी बाजार से गायब हो गया था। विवाद थमने के बाद एक बार फिर मैगी बिकने लगा है, लेकिन इस दौरान कंपनी को करोड़ों की चपत लगी है।