मुंबई : रिजर्व बैंक ने बिटकॉइन जैसी निजी आभासी मुद्राओं के उपयोग को हतोत्साहित करने के लिये नियमों को आज कड़ा किया। पर इसके साथ ही उसने देश में अधिकृत डिजिटल मुद्रा पेश करने की संभावना के बारे में अध्ययन कराने के लिए एक समूह गठित करने की भी घोषणा की जिसे केंद्रीय बैंक जारी कर सकता है। यह समूह तीन महीने में रिपोर्ट देगा।

रिजर्व बैंक ने कहा कि ''केंद्रीय बैंक की एक डिजिटल मुद्रा'' पेश करने की ''वांछनीयता और व्यवहारिकता'' का अध्ययन करने तथा उसके बारे में कुछ दिशानिर्देश सुझाने के लिये एक अंतर-विभागीय समूह का गठन किया गया है। समूह जून तक अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद डिप्टी गवनर्र बीपी कानूनगो ने संवाददाताओं से कहा, ''कई केंद्रीय बैंक अधिकृत डिजिटल मुद्रा पेश करने की संभावना पर चर्चा कर रहे हैं।

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निजी डिजिटल टोकन(करेंसी) के विपरीत अधिकृत डिजिलटल मुद्राएं केंद्रीय बैंक जारी कर सकते हैं। इसमें केंद्रीय बैंक की जवाबदेही होगी और यह मौजूदगा कागजी मुद्रा के अलावा होगी।'' उन्होंने कहा, ''हमने आरबीआई के अंतर्गत आने वाली इकाइयों के मामले में आभासी मुद्राओं से निपटने के जोखिम को लेकर शिकंजा कसा है। इन इकाइयों को उन लोगों या कंपनियों के साथ कारोबारी संबंधों को तत्काल रोकने की जरूरत है जो आभासी मुद्रा में काम करती हैं। उन्हें तीन महीने के भीतर मौजूदा संबंधों को खत्म करना होगा।''

कानूनगो ने यह भी कहा कि इस प्रकार की मुद्रा से कागजी मुद्रा की छपाई और उसे परिचालन में लाने की लागत की बचत होगी। उन्होंने कहा कि बिटकाइन जैसी डिजिटल मुद्राओं की रीढ़ ''ब्लाकचेन'' या वितरित लेजर प्रौद्योगिकी है। उनका व्यापक अर्थव्यवस्था के लिये काफी महत्व है और हमें इसे अपनाने की जरूरत है। डिप्टी गवर्नर ने कहा, ''हमारा यह भी मानना है कि अर्थव्यवस्था के लाभ के लिये उसे प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।'' उल्लेखनीय है कि दुनिया भर में बिटकाइन और उसकी सुरक्षा को लेकर काफी चिंता है। इसका कारण यह है कि सरकार या केंद्रीय बैंक इसका नियमन नहीं करते। इससे मनी लांड्रिंग का जोखिम है।