नई दिल्ली : लोकसभा में बुधवार को हंगामे के बीच बिना किसी बहस के केंद्रीय बजट पारित हो गया जिसके बाद कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के सदस्य सदन से बाहर चले गए। इस बीच तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा), वाईएसआर कांग्रेस, अखिल भारतीय द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके), समाजवादी पार्टी (सपा) के सदस्यों ने विधानसभा अध्यक्ष के आसन के समक्ष अपने-अपने मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने हंगामे के बीच वित्त विधेयक 2018 और विनियोग विधेयक पेश किया जोकि ध्वनिमत से पारित हुआ। लोकसभा में विपक्षी पार्टियां पीएनबी घोटाले, आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने, कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड के गठन समेत कई मुद्दों को लेकर सदन में प्रदर्शन कर रहीं हैं। बुधवार को भी सदन की कार्यवाही शुरू होते ही इन्हीं मुद्दों को लेकर हंगामा हुआ।

हंगामे के बीच, संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने अध्यक्ष सुमित्रा महाजन से वित्तीय मामलों को दोपहर 12 बजे शुरू करने का आग्रह किया, जिसपर उन्होंने सहमति जताई। सदन की कार्यवाही दोबारा 12 बजे शुरू होते ही, तेदेपा, वाईएसआर कांग्रेस, एआईएडीएमके व समाजवादी पार्टी के सदस्य अध्यक्ष के आसन के समक्ष आ गए और नारे लगाने लगे।

समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने गोरखपुर के डीएम राजीव रौतेला द्वारा मतदान केंद्र पर पत्रकारों के दाखिले से मनाही के मुद्दे पर सुमित्रा महाजन से उत्तर प्रदेश में 'लोकतंत्र बचाने' का आग्रह किया और राज्य की भाजपानीत सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन किया।

लोकसभा अध्यक्ष वित्त विधेयक समेत अन्य विधेयक को पास करने की मंजूरी दे रही थीं, पीएनबी घोटाला मामले में प्रदर्शन कर रही कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और वाम पार्टियों के सदस्य अपनी जगहों से खड़े हो गए। इस दौरान अध्यक्ष के आसन के समीप खड़े सदस्यों ने नारे लगाए।

बाद में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के सदस्य यह कहते हुए सदन से बाहर चले गए कि यह 'संसदीय लोकतंत्र की हत्या' है। इससे पहले मंगलवार को भी, विपक्षी पार्टियों के सदस्यों ने विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया था।

जैसे ही दोनों विधेयक ध्वनिमत से पारित हुआ, सत्ता पक्ष के सदस्यों को इसके स्वागत में मेज थपथपाते हुए देखा गया। वित्त विधेयक 2018 और विनियोग विधेयक पास होते ही लोकसभा में बजट का कार्य पूरा हुआ।

-आईएएनएस