नयी दिल्ली: कश्मीर पर बातचीत के लिए केंद्र के विशेष प्रतिनिधि दिनेश्वर शर्मा ने आज कहा कि घाटी में हिंसा के चक्र से वह‘‘ दुखी' हैं लेकिन उन्हें उम्मीद है कि इन गर्मियों में वहां शांति रहेगी क्योंकि कई लोगों खासकर युवाओं ने उन्हें राज्य में शांति दूतों के रूप में काम करने का भरोसा दिया है।

लेह और कारगिल की अपनी पहली यात्रा से पूर्व शर्मा ने कहा कि युवा शांति के लिए काम करेंगे क्योंकि वे समझ गए हैं कि सभी समस्याओं का हल तभी हल हो सकता है जब वहां शांति हो। शर्मा ने कश्मीर घाटी में हिंसा की हालिया घटनाओं के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में पीटीआई से कहा, ‘‘ मैं आश्वस्त हूं कि वे( युवा) शांति दूतों की भूमिका निभाएंगे।'' उन्होंने घाटी की अपनी यात्रा से पहले कहा, ‘‘ यद्यपि मैं कश्मीर में हिंसा के चक्र से दुखी हूं लेकिन मैं आशान्वित हूं कि इस साल की गर्मी शांतिपूर्ण रहेगी।

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मुझे जम्मू कश्मीर के लोगों खासकर युवाओं में पूरा भरोसा है।'' पिछले साल अक्तूबर में केंद्र के विशेष प्रतिनिधि का जिम्मा संभालने के बाद यह उनकी छठी यात्रा होगी। खुफिया ब्यूरो के पूर्व अधिकारी घाटी में हाल में हिंसा की घटनाओं में तेजी आने से अप्रसन्न दिखे। उन्होंने कहा, ‘‘ मैं सुरक्षा बलों को ज्यादा से ज्यादा संयम बरतने की सलाह दे रहा हूं लेकिन कुछ छिटपुट घटनाएं हो रही हैं जिन्हें तुरंत समाप्त होना चाहिए।''

शर्मा ने स्पष्ट किया कि कश्मीर घाटी में सुरक्षाकर्मी सीमा पार से सक्रिय रूप से प्रायोजित आतंकवाद का मुकाबला करने में सराहनीय कार्य कर रहे हैं। उन्होंने पिछले महीने दक्षिणी कश्मीर के शोपियां का दौरा किया था। उसका जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘ लोगों की अपनी शिकायतें हैं जिन्हें दूर किया जाना चाहिए।'' शर्मा ने कहा, ‘‘ अपनी बातचीत के दौरान, मैंने पाया कि लोग कड़वाहट से भरे हैं। यह कहते हुए मैं स्पष्ट करना चाहूंगा कि उनके घाव भरे जा सकते हैं। उम्मीदें बाकी हैं।''

दिनेश्वर शर्मा ने कहा कि हिंसा से हिंसा पैदा होती है और इस प्रकार की अब कोई गड़बडी़ आगामी पर्यटन मौसम को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने कहा कि कई परिवार पर्यटन उद्योग पर निर्भर हैं। शिकारावाला, हाउसबोट, टैक्सी चालक, होटल आदि। उनकी उम्मीदें इस मौसम पर है और सही सोच वाला कोई भी व्यक्ति आम लोगों के सपनों को नहीं कुचलना चाहेगा। शर्मा ने कहा कि लोगों को सीमा पार से निहित स्वार्थ के साथ चलाए जा रहे दुष्प्रचार का शिकार नहीं होना चाहिए।

अलगाववादियों के साथ बातचीत के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘‘ मेरे दरवाजे खुले हैं। कोई भी व्यक्ति जो आम कश्मीरी लोगों की पीड़ा को महसूस कर सकता है, वह पत्थर या गोलियों के बदले बातचीत की मेज चुनेगा। यही बात घाटी में अलगाववादी नेताओं पर भी लागू होती है। उम्मीद है कि वे अपने अंदर की आवाज सुनेंगे।'' शर्मा आज से लेह और कारगिल की चार दिनों की यात्रा पर रहेंगे। वह अक्सर कश्मीर की यात्रा करते रहे हैं और उनकी यात्रा सिर्फ श्रीनगर तक ही सीमित नहीं रही है। उन्होंने घाटी में ऐसे स्थानों का भी दौरा किया है जिन्हें आतंकवाद का केंद्र माना जाता है।