नयी दिल्ली : आंध्रप्रदेश को विशेष दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर आज राज्यसभा में विभिन्न दलों के सदस्यों ने हंगामा किया। जिसकी वजह से सदन की कार्यवाही एक बार स्थगित करनी पड़ी। आंध्रप्रदेश मुद्दे पर हंगामे की शुरूआत करीब 12 बजे शुरू हुयी जब बैठक एक बार के स्थगन के बाद फिर शुरू हुयी।

सपा के नरेश अग्रवाल ने प्रस्ताव किया कि प्रश्नकाल स्थगित कर आम बजट पर चर्चा शुरू की जाए। सदन ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। लेकिन इसी दौरान कुछ सदस्य आंध्रप्रदेश को विशेष दर्जा देने की मांग करते हुए हंगामा करने लगे। कुछ सदस्य अपने स्थानों से आगे भी आ गए।

सभापति एम वेंकैया नायुडू ने उनसे अपने स्थानों पर जाने की अपील की और कहा कि बजट पर चर्चा के दौरान सदस्यों को अपनी बात कहने का मौका मिलेगा। तेदेपा सदस्य सी एम रमेश ने कहा कि यह एक संवेदनशील मुद्दा है और उनका राज्य जल रहा है।

केंद्रीय मंत्री और तेदेपा सदस्य वाई एस चौधरी ने कांग्रेस और भाजपा दोनों की आलोचना करते हुए कहा कि यह सब जानते हैं कि किस प्रकार आंध्रप्रदेश पुनर्गठन कानून अनुचित और अवैज्ञानिक तरीके से पारित कराया गया था। चौधरी ने कहा कि हमारी सरकार पिछले साढ़े तीन साल में आंध्र प्रदेश पुनर्गठन कानून के कुछ प्रावधानों को लागू नहीं कर सकी और वित्त मंत्री को बजट पर चर्चा के अपने जवाब में इसे हल करना चाहिए।

इसके बाद संसदीय कार्य राज्य मंत्री विजय गोयल ने कहा कि वित्त मंत्री अपने जवाब में इस मुद्दे के हल का प्रयास करेंगे। कुछ सदस्यों ने मंत्री की टिप्पणी पर आपत्ति जतायी। वाईएसआर कांग्रेस के विजय साई रेड्डी ने व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए कहा कि मंत्रिपरिषद की सामूहिक जिम्मेदारी होती है।

उन्होंने कहा कि वाई एस चौधरी को इस्तीफा दे देना चाहिए क्योंकि वह कैबिनेट के फैसले से सहमत नहीं हैं। वाईएसआर सदस्य की मांग को नामंजूर करते हुए नायडू ने कहा कि कोई भी मंत्री सदस्य के रूप में अपनी राय दे सकते हैं। इस मुद्दे पर सदन में हंगामा जारी रहा और सभापति नायडू ने 12 बजकर करीब 15 मिनट पर बैठक दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।