नई दिल्ली : कुतुब मीनार, 120 मीटर ऊंची दुनिया की सबसे बड़ी ईटों की मीनार है और मोहाली की फ़तेह बुर्ज के बाद भारत की दूसरी सबसे बड़ी मीनार है। बता दें कुतुबुद्दीन ऐबक ने 1199 में कुतुब मीनार का निर्माण शुरू करवाया था और उसके दामाद एवं उत्तराधिकारी शमशुद्दीन इल्तुतमिश ने 1368 में इसे पूरा कराया। कुतुब मीनार का आस-पास का परिसर कुतुब कॉम्पलेक्स से घिरा हुआ है, जो एक UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज साईट भी है।

कुतुबुद्दीन ऐबक इन्होंने   क़ुतुब मीनार का निर्माण शुरू करवाया।
कुतुबुद्दीन ऐबक इन्होंने  क़ुतुब मीनार का निर्माण शुरू करवाया।
शमशुद्दीन इल्तुतमिश, इन्होंने 1368 में  कुतुब मीनार को पूरा कराया।
शमशुद्दीन इल्तुतमिश, इन्होंने 1368 में कुतुब मीनार को पूरा कराया।

जानकारी के मुताबिक इस इमारत का नाम ख्वाजा क़ुतबुद्दीन बख्तियार काकी के नाम पर रखा गया था। ऐसा कहा जाता है कि कुतुब मीनार का प्रयोग उसके पास बनी मस्जिद की मीनार के रुप में होता था और यहां से अजान दी जाती थी। कुतुब मीनार के दिवारों पर कुरान की आयतें लिखी हुई है। वैसे तो ये मीनार पहले सात मंज़िल की थी लेकिन अब ये पांच मंज़िल की ही रह गई है। कुतुब मीनार में 379 सीढ़ियां हैं, और इसकी कुल ऊंचाई 72.5 मीटर है।

ख्वाजा क़ुतबुद्दीन बख्तियार काकी के नाम पर रखा गया था इमारत का नाम।
ख्वाजा क़ुतबुद्दीन बख्तियार काकी के नाम पर रखा गया था इमारत का नाम।
 दिवारों पर लिखी हुई कुरान की आयतें।
दिवारों पर लिखी हुई कुरान की आयतें।

क़ुतुब मीनार परिसर में और भी कई इमारते हैं। भारत की पहली कुव्वत-उल-इस्लाम-मस्जिद, अलई दरवाज़ा और इल्तुतमिश का मक़बरा भी यहाँ बना हुआ है। मस्जिद के पास ही चौथी शताब्दी में बना लौहस्तंभ भी है जो यहां आएं पर्यटकों को खूब आकर्षित करता है।

भारत की पहली कुव्वत-उल-इस्लाम-मस्जिद।
भारत की पहली कुव्वत-उल-इस्लाम-मस्जिद।
अलई दरवाज़ा।
अलई दरवाज़ा।
चौथी शताब्दी में बना लौहस्तंभ ।
चौथी शताब्दी में बना लौहस्तंभ ।

पांच मंज़िला इस इमारत की तीन मंज़िलें लाल पत्थरों से एवं दो मंज़िलें संगमरमर एवं लाल पत्थर से निर्मित हैं। प्रत्येक मंज़िल के आगे बालकॉनी होने से भली-भांति दिखाई देती है।

मीनार में देवनागरी भाषा के शिलालेख के अनुसार यह मीनार 1326 में क्षतिग्रस्त हो गई थी और इसे मुहम्मद बिन तुग़लक़ ने ठीक करवाया था। इसके बाद में 1368 में फ़िरोज़शाह तुग़लक़ ने इसकी ऊपरी मंज़िल को हटाकर इसमें दो मंज़िलें और जुड़वा दीं।

मुहम्मद बिन तुग़लक़
मुहम्मद बिन तुग़लक़
फ़िरोज़शाह तुग़लक़।
फ़िरोज़शाह तुग़लक़।

इसके पास सुल्तान इल्तुतमिश, अलाउद्दीन ख़िलज़ी, बलबन व अकबर की धाय माँ के पुत्र अधम ख़ां के मक़बरे स्थित हैं। बता दें कुतुब का अर्थ न्याय का स्तंभ होता है।

इल्तुतमिश का मक़बरा।
इल्तुतमिश का मक़बरा।
 अलाउद्दीन ख़िलज़ी मकबरा।
अलाउद्दीन ख़िलज़ी मकबरा।

लोगों का मानना है कि इस मीनार के चक्कर लगाने से मन की मुराद पूरी हो जाती है। तो अगर अभी तक दिल्ली में स्थित इस कुतुबमीनार को आपने नहीं देखा है तो अब जाने में बिलकुल देरी मत कीजिए..यकिनन इतिहार के पन्नों में दर्ज इमारतों में से ये एक इमारत आपको खूब पंसद आएंगी।