मकर संक्रांति देशभर में विभिन्न रूपों में मनाई जाती है। पंजाब में इसे लोहड़ी के रूप में एक दिन पहले मनाए जाने की परंपरा है, जबकि उत्तर प्रदेश और बिहार सहित विभिन्न राज्यों में इसे खिचड़ी पर्व के रूप में मनाया जाता है। मकर संक्रांति हमारे देश की समृद्ध विरासत एवं सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है।

रविवार को सूर्यास्त के बाद सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेगा। इसी के साथ मकर संक्रांति का पर्व शुरू हो जाएगा, जो सोमवार तक चलेगा। हालांकि लोग रविवार सुबह से ही पवित्र नदियों में स्नान कर दान-पुण्य कर रहे हैं। इलाहाबाद, हरिद्वार, वाराणसी और गंगासागर में प्रत्येक वर्ष की तरह लोग पुण्य की डुबकी लगाकर तिल के लड्डू, खिचड़ी आदि का दान कर रहे हैं।

दान की परंपरा
दान की परंपरा

मकर संक्रांति के शुभ उत्सव पर हजारों श्रद्धालुओं ने रविवार को ठंडे मौसम का सामना करते हुए भी हिमाचल प्रदेश की विभिन्न नदियों में डुबकी लगाई। शिमला से 52 किलोमीटर दूर तत्तापानी में सतलुज और कुल्लू जिले में सिखों के पवित्र धर्मस्थल मणिकरण में पार्वती नदी में डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी।

तत्तापानी और मणिकरण में मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली से भक्त पहुंचे। तत्तापानी के एक पुजारी ने आईएएनएस को बताया, "हर साल मकर संक्रांति पर 20,000 से अधिक श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद होती है।"

लोकप्रिय पर्यटक स्थल मनाली के बाहरी इलाके में स्थित वशिष्ठ मंदिर में भी भक्तों ने डुबकी लगाई। मकर संक्राति का त्योहार गर्म दिनों के आगमन का सूचक है और यह देश के विभिन्न हिस्सों में धार्मिक हर्षोल्लास से मनाया जाता है।

भारत के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालुओं के साथ ही पड़ोसी देशों नेपाल, भूटान और बांग्लादेश के श्रद्धालुओं ने भी मकर सक्रांति के मौके पर गंगा और बंगाल की खाड़ी के संगम स्थल पर स्नान किया। सागरद्वीप के नाम से मशहूर गंगा सागर के पवित्र जल में स्नान करने के लिए श्रद्धालु यहां तड़के से ही जुटने लगे थे।

बड़ी संख्या में आए श्रद्धालुओं को यहां जगह की कमी का भी सामना करना पड़ा। मकर संक्रांति के मौके पर यहां हर साल बड़ी संख्या में लोग गंगा और बंगाल की खाड़ी के संगम स्थल पर स्नान करने और कपिल मुनि मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं।

मकर संक्रांति के मौके पर यहां आए पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री की गंगा सागर मेला को कुंभ मेला की तरह देखे जाने की मांग का स्वागत किया है। सरस्वती ने कहा, “ मैं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री की गंगा सागर मेले को कुंभ मेले की तरह देखे जाने की मांग का स्वागत करता हूं और उनका शुक्रिया अदा करता हूं।”

ममता ने हाल ही में कहा था कि गंगा सागर मेले का आयोजन सालों से हो रहा है और प्रत्येक साल यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं इसलिए इसे कुंभ मेले के बराबर दर्जा मिलना चाहिए। दक्षिणी 24 परगना जिला मजिस्ट्रेट वाई रत्नाकर राव ने पीटीआई...भाषा को बताया, “ पिछले साल करीब 15 लाख लोग गंगा सागर आए थे। इस साल हमने इस आंकड़े को पार कर लिया है और करीब 20 लाख लोग यहां हैं। हमने उनके लिए सारी व्यवस्थाएं की है ताकि यह उनके लिए यह यादगार हो सके।”

तिल के लड्डू
तिल के लड्डू

क्या है मान्यता

मान्यता है कि इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है और उत्तरायण हो जाता है। उत्तरायण को सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। मकर संक्रांति पर सूर्य की राशि में हुआ परिवर्तन अंधकार से प्रकाश की ओर अग्रसर होने का द्योतक है। प्रकाश अधिक होने से प्राणियों की चेतना एवं कार्यशक्ति में वृद्धि होती है, इसलिए पूरे भारत में इस अवसर पर लोग विविध रूपों में सूर्य की उपासना करते हैं।

दान की परंपरा

मकर संक्रांति पर स्नान के साथ दान का विशेष महत्व है। लोग नदी में डुबकी लगाने के बाद घाट पर ही पुरोहित को चावल और उड़द की दाल मिलाकर दान करते हैं। इसमें तिल के लड्डू भी रखे जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस जन्म में दिया गया दान अगले जन्म में आनाज के रूप में हमें मिलता है।

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