कोलकाता: भारतीय विद्यामंदिर और भारतीय संस्कृति संसद की ओर से 'हिंदीतर प्रांतों में हिंदी भाषा-साहित्य: दशा और दिशा' विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया।

सम्मेलन का संयोजन डॉ बाबूलाल शर्मा ने किया। कोलकाता के जी डी बिड़ला सभागार में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी भी इस मौके पर शरीक हुए। बाकी दो दिवसीय सत्र विद्यामंदिर सभागार में संपन्न की गई।

इस दौरान हैदराबाद की हिंदीसेवी और साहित्यकार डॉ अहिल्या मिश्रा को सम्मानित किया गया। इसके अलावा डॉक्टर अहिल्या मिश्रा ने राजभवन में राज्यपाल डॉ केशरीनाथ त्रिपाठी से मुलाकात की। इस दौरान गैर हिंदी प्रांतों में हिंदी के प्रचार प्रसार को लेकर चर्चा हुई।

राजभवन में राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी से मुलाकात करती हुईं डॉ अहिल्या मिश्रा व अन्य
राजभवन में राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी से मुलाकात करती हुईं डॉ अहिल्या मिश्रा व अन्य

बता दें कि डॉक्टर अहिल्या मिश्रा का तेलंगाना और खासकर हैदराबाद में हिंदी के प्रचार प्रसार में बड़ा योगदान रहा है। हैदराबाद में कादम्बिनी क्लब के जरिए इन्होंने गैर हिंदी भाषियों को राष्ट्रभाषा से जोड़ने का प्रखर प्रयास किया है।

कोलकाता में आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन में देश भर से 500 से अधिक लेखकों, संपादकों के साथ ही 12 अन्य देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

सम्मेलन का आयोजन भारतीय विद्यामंदिर और भारतीय संस्कृति संसद के संस्थापक माधोदास मूंधड़ा के जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में किया गया था। भारतीय विद्यामंदिर के अध्यक्ष डॉ बिट्ठल दास मूंधड़ा ने हिंदी को गैर हिंदी भाषी क्षेत्रों में आम लोगों की संपर्क भाषा बनाने पर जोर दिया गया।

डा मूंधड़ा ने साहित्यकारों का ध्यान इस ओर भी आकृष्ट किया कि हमारे देश में तकनीकी पाठ्यक्रम अंग्रेजी में है। जिसे हिंदी में लिखने की दरकार है।