हैदराबाद: मुर्गा लड़ाई को लेकर उच्चतम न्यायालय से राहत मिली है। उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय ने इस पर प्रतिबंध लगाते हुए आदेश जारी किया था। संयुक्त न्यायालय ने मुर्गा लड़ाई पर सरकार के रवैये को लेकर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि आंध्र प्रदेश में मुर्गा लड़ाई पर प्रतिबंध लगाने के लिए वर्ष 2016 में जो आदेश दिया गया था उसे अब तक क्यों लागू नहीं किया गया इस पर जवाब दें। न्यायालय ने कहा कि यदि उनके आदेश का उल्लंघन होता है तो इसके लिए राज्य सरकार को जिम्मेदारी लेनी होगी। इस पर भाजपा नेता रघुरामकृष्ण राजू ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की थी।

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उच्चतम न्यायालय ने इस मामले पर सुनवाई के बाद इस पर राहत देते हुए कहा कि मुर्गा लड़ाई के दौरान किसी भी स्थिति में मुर्गों के पैर में चाकू ना बांधा जाए। उल्लेखनीय है कि संक्राति के संदर्भ में आंध्र प्रदेश में बड़े पैमाने पर मुर्गा लड़ाई होती है और इसे देखने के लिए आंध्र प्रदेश ही नही बल्कि पड़ोसी राज्यों से भी बड़े पैमाने पर लोग आते हैं और इस दौरान लाखों रुपये का सट्टा लगता है।

रामकृष्ष राजू ने अपनी याचिका में उच्च- न्यायालय के आदेश को गलत ठहराते हुए कहा था कि यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस ने किसानों के घर से मुर्गों को सीज़ करना शुरू कर दिया था जबकि किसानों ने इसके लिए हजारो रुपये खर्च किये थे। उल्लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय ने पिछले वर्ष ही मुर्गा लड़ाई पर प्रतिबंध को गलत ठहराते हुए यह भी कहा था कि लड़ाई के दौरान मुर्गों के पैर में चाकू ना बांधा जाए।