नई दिल्ली : भारतीय अर्थव्यवस्था में मोबाइल टेलीफोनी का कुल प्रत्यक्ष योगदान अनुमानत: 2520 अरब रुपये का है। ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम द्वारा गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। इस रिपोर्ट में मोबाइल हैंडसेट निर्माण क्षेत्र की समस्याओं और 5जी ईकोसिस्टम की सफलता व विकास पर प्रकाश डाला गया है।

यह रिपोर्ट आईआईएम-कलकत्ता और थॉट आर्ब्रिटेज रिचर्स इंस्टीट्यूट (टारी) की साझेदारी में तैयार की गई और यह घरेलू मोबाइल उद्योग की स्थिति सुधारने तथा 'मेक-इन-इंडिया' को सफल बनाने पर केंद्रित है।

ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम (बीआईएफ) ने गुरुवार को नई दिल्ली में एक शिखर वार्ता का आयोजन किया, जिसका विषय 'मोबाइल टेलीफोनी इन इंडिया - टुवार्डस ए सस्टेनेबल इनोवेशन ईकॉनॉमी' (भारत में मोबाइल टेलीफोनी : सतत रचनात्मक अर्थव्यवस्था की ओर एक कदम) था।

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ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम के अध्यक्ष टी. वी. रामचंद्रन ने बताया, "इस अध्ययन में मोबाइल टेलीफोनी सेक्टर में 'मेक इन इंडिया' अभियान का विश्लेषण किया गया है। भारत में अपने डिवाइसों का निर्माण कर रहे विदेशी निर्माताओं की बढ़ती संख्या के बीच, भारतीय कंपनियां अपने शोध व विकास केंद्र को उन्नत बनाकर खुद के बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना चाहती हैं। यह आगामी 5जी ईकोसिस्टम में भी इन कंपनियों की भूमिका प्रशस्त करेगा, जो इस क्षेत्र में परिवर्तन लाने वाली टेक्नॉलॉजी है तथा भारत सरकार इसे अपने फ्लैगशिप 'मेक-इन-इंडिया' कार्यक्रम से जोड़ना चाहती है।"

उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में मोबाइल टेलीफोनी का कुल प्रत्यक्ष योगदान अनुमानत: 2520 अरब रुपये का है, जो साल 2015 के लिए भारत की जीडीपी का लगभग 1.75 प्रतिशत है।