हैदराबाद : पिछले 54 दिनों से अनशन कर रही संगीता को अंतत: न्याय मिला है। मियापुर फैमिली कोर्ट ने पति श्रीनिवास रेड्डी को ताकीत दी है कि वो अनशन कर रही अपनी पत्नी को सम्मान के साथ घर ले जाये और हर महीने 20 हजार रुपये मेंटेनेंस के लिए दें। गुरुवार को फैमिली कोर्ट ने संगीता के समर्थन में फैसला सुनाया है।

बता दें कि बोडुप्पल निवासी संगीता अपने पति की प्रताड़ना के विरोध में पिछले 54 दिनों से अनशन कर रही है।

दूसरी ओर संगीता के पति श्रीनिवास रेड्डी ने इस फैसले विरोध में एक और याचिक दायर की है। उन्होंने दायर याचिका में कहा कि उसकी पत्नी संगीता को सम्मान के साथ ले जाएगा और उसे अपनी पत्नी के रूप में ले जाने का आश्वासन देता है। फिर ऐसे समय में वो पत्नी को घर में ही रखकर मेंटनेंस के लिए 20 हजार रुपये क्यों और किस लिए दें?

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उल्लेखनीय है कि संगीता ने हाल ही में पति, सास और ससूर द्वारा मारे जाने और लैंगिक रुप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और मेंटनेंस के लिए 20 हजार रुपये देने की मांग की थी। फैसले के दौरान संगीता का पति, सास और ससूर कोर्ट में उपस्थित हुए। मगर संगीता मात्र अनशन पर ही बैठी हुई थी।

संगीता ने तोड़ा ताला...

इसी क्रम में फैमिली कोर्ट के फैसले के बाद संगीता ने बोडुप्पुल स्थित मकान का ताला तोड़कर अपनी बेटी के साथ मकान में प्रवेश किया। इस दौरान महिला संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद थे। उन्होंने कहा कि कोर्ट के फैसले से संगीता और उसकी बेटी को न्याय मिला है। साथ ही कहा कि कोर्ट के फैसले के बजाय संगीता को उसके पति और सास-ससूर ले जाते तो अच्छा होता। उन्होंने संगीता के पति और सास-ससूर को सुझाव दिया कि वो बेटी के भविष्य को ध्यान में रखते हुए संगीता के साथ समझौता के लिए आगे आये।

बेटी का भविष्य ही...

इस अवसर पर संगीता ने 'साक्षी' से कहा कि बेटी का भविष्य ही उनके लिए सबसे मुख्य है। यदि पति श्रीनिवास उसके साथ मिलकर गुजारा करने के लिए आते तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने बताया कि उसके पति के अन्य महिला से अवैध संबंध होने के कारण ही पारिवारिक कलह शुरू हुआ है। यदि उसका पति खुशी से मिलजुलकर रहने का आश्वासन देता है तो वो मामला वापस लेने के लिए तैयार है।