हैदराबाद : ‘तेलंगाना चाकली एससी साधन समिति’ के संयोजक कोत्ताकोंडा श्रीलक्ष्मी ने कहा कि देश के 18 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में रजक जाति को एससी सूची में शामिल किया गया है। मगर तेलुगु राज्यों में रजकों को बीसी 'ए' सूची में रखा जाना कहां तक उचित है?

श्रीलक्ष्मी के नेतृत्व में गत वर्ष 2 जुलाई से भद्राचलम में आरंभ हुई पदयात्रा हैदराबाद के सरूरनगर स्टेडियम में रविवार को समाप्त हुआ।

श्रीलक्ष्मी ने तेलुगु राज्यों की सरकारों से मांग की है कि रजक जाति को एससी सूची में शामिल किया जाए। वर्ना रजक जाति को एससी सूची में शामिल करने के लिए वो प्राण त्याग को भी तैयार है।

श्रीलक्ष्मी बताया कि वह 190 दिनों तक 31 जिलों में पदयात्रा की है। उनकी पदयात्रा का लक्ष्य रजकों में जागरुकता लाना मात्र है। रजकों की समस्याओं का समाधान केवल एससी की सूची में शामिल किये जाने पर होगा। रजकों की सुरक्षा के लिए एट्रासिटी कानून की भी आवश्यकता है।

इस कार्यक्रम में बिहार के पूर्व मंत्री एवं विधायक श्याम रजक, अखिल भारत धोबी महासंघ के अध्य्क्ष वी. चंद्रशेखर, हरियाणा सदस्य अमित खत्री, रजक जेएसी के प्रदेश अध्यक्ष अंजय्या ने भाग लिया।

इस अवसर पर नेताओं ने कहा कि एक देश, एक काम, एक संविधान के अनुसार रजकों को एससी सूची में शामिल किया जाए। यह मांग पिछले 70 सालों से की जा रही है। मगर सरकार उनकी मांग को ठुकराते जा रही है।

उन्होंने कहा कि रजकों को एससी सूची में शामिल किये जाने पर ही शिक्षा, रोजगार और नौकरियों में मौका मिलेगा। उन्होंने बताया कि राज्य में 30 लाख रजक हैं। मगर एक विधायक भी नहीं है। यदि आरक्षण की सुविधा मिल जाती है तो संविधान सभाओं में रजकों को जाने का मौका मिलेगा।