जकार्ता : विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने आसियान के साथ और अधिक गहरे आर्थिक संबंधों की वकालत करते हुए शनिवार को कहा कि भारत साझी सुरक्षा व साझी समृद्धि के दोहरे सिद्धांत पर आधारित एक क्षेत्रीय ढांचा तैयार करना चाहता है।

उन्होंने जकार्ता क्षेत्र के कुछ प्रमुख शोध संस्थानों के नेटवर्क, आसियान इंडिया नेटवर्क ऑफ थिंक टैंक्स के पांचवें गोलमेज सम्मेलन का उद्घाटन किया। विदेश मंत्री ने सदस्य देशों और भारत के बीच समुद्री सुरक्षा, व्यापार एवं निवेश और शिक्षा एवं सांस्कृतिक विरासतों के संवर्धन के क्षेत्र में सहयोग का विस्तृत करने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, ये बिंदु दक्षिण पूर्वी एशिया के साथ संपर्क में तथा आसियान के साथ वाणिज्य, संपर्क व संस्कृति में रणनीतिक संबंध विस्तृत करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।

तीन देशों की अपनी यात्रा के दूसरे चरण में थाईलैंड से जकार्ता पहुंचीं सुषमा स्वराज ने कहा कि भारत और आसियान के सभी सदस्य देश समुद्री व्यापार का समृद्ध व गौरवशाली इतिहास रखते हैं। उन्होंने कहा, हमने अपने पुराने संबंधों को समकालीन स्थिति में तरोताजा किया है ताकि हम एशिया के पुन: प्रादुर्भाव के वाहक बन सकें।

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सुषमा ने कहा, एक परिपक्व और जिम्मेदार देश होने के नाते भारत की विदेश नीति की दिलचस्पी साझी सुरक्षा और साझी समृद्धि के दोहरे सिद्धांतों पर आधारित क्षेत्रीय ढांचा तैयार करने में रही है। इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में अपने विजन सागर (सिक्योरिटी एंड ग्रोथ फोर ऑल इन द रीजन) में प्रतिपादित किया था।

उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र को संपर्क मार्ग के रुप में देखा जाने लगा है, क्योंकि विश्व का ज्यादातर व्यापार इन महासागरों से ही गुजरता है। उन्होंने कहा, इन महासागरों को न सिर्फ (संपर्क की दृष्टि से) अच्छे से जुड़ा होना चाहिए बल्कि इन्हें पारंपरिक व गैर पारंपरिक खतरों से भी सुरक्षित होना चाहिए ताकि लोगों, सामानों एवं विचारों का स्वतंत्र आवागमन सुनिश्चित हो सके।

भारत और आसियान के बीच वार्ता साझेदारी के 25 वर्ष पूरे होने पर नई दिल्ली 25 जनवरी को स्मृति शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। इसमें समूह के सभी नेताओं के हिस्सा लेने की संभावना है। सुषमा ने उनके सम्मान में जकार्ता में आयोजित रिसेप्शन के दौरान भारतीय समुदाय को संबोधित भी किया।

सिंगापुर के व्यापार एवं उद्योग मंत्री एस. ईश्वरन ने कहा कि आधारभूत संरचना, नवाचार, स्टार्टअप और डिजिटल अर्थव्यवस्था समेत विभिन्न क्षेत्रों में भारत और आसियान देशों के बीच तालमेल के काफी अवसर हैं। उन्होंने आंध्र प्रदेश की प्रस्तावित राजधानी अमरावती का जिक्र करते हुए कहा कि यह इस बात का उदाहरण है कि हम साथ मिलकर क्या कर सकते हैं।

अमरावती का मास्टर प्लान तैयार करने में सिंगापुर के नियोजकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। ईश्वरन दो दिवसीय आसियान-इंडिया प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। यह सम्मेलन शनिवार से शुरू हुआ।