नई दिल्ली : भारत और चीन के विशेष प्रतिनिधियों ने शुक्रवार को अपने पुराने सीमा विवाद पर 'सकारात्मक और केंद्रित' वार्ता की और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखने की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की। यह बैठक डोकलाम संकट के चार माह बाद हो रही है।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार व भारत के विशेष प्रतिनिधि अजीत डोभाल और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के पोलितब्यूरो के सदस्य एवं स्टेट काउंसिलर एवं चीन के विशेष प्रतिनिधि यांग जिएची के बीच नई दिल्ली में विशेष प्रतिनिधि स्तर की 20वीं बैठक संपन्न हुई।

दोनों पक्ष एक दूसरे की संवेदनशीलता, चिंताओं और आकांक्षाओं पर सम्मान के साथ अपने मतभेदों के बीच पारस्परिक रूप से स्वीकार्य प्रस्तावों की पहचान करने पर सहमत हुए।

विदेश मंत्रालय ने सीमा मुद्दे पर दोनों देशों के बीच हुई बातचीत के बाद बयान जारी कर कहा, "दोनों प्रतिनिधियों ने अपने पहले चरण की वार्ता पर वृहत समीक्षा की और प्रतिनिधि दोनों देशों के मौलिक हितों को ध्यान में रखते हुए सीमा मुद्दे का जल्द हल निकालने पर सहमत हुए।"

बयान के अनुसार, "बातचीत काफी सकारात्मक और केंद्रित रही और विशेष प्रतिनिधियों ने जल्द से जल्द भारत-चीन सीमा मुद्दे पर व्यावहारिक और स्वीकार्य समझौते पर पहुंचने की प्रतिबद्धता जताई।"

मंत्रालय के अनुसार, "दोनों पक्षों ने सीमा मुद्दे पर आपसी सहमति से मामला सुलझाए जाने पर जोर देते हुए विभिन्न क्षेत्रों में संबंध बहाली के विभिन्न उपायों पर भी बातचीत की।"

इस साल भारत, चीन, भूटान तिराहे पर डोकलाम में भारत और चीन के बीच गतिरोध के बाद यह इस तरह की पहली बैठक है।

इस महीने की शुरुआत में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच बैठक के दौरान डोकलाम मुद्दा उठा था। पिछली विशेष प्रतिनिधि बैठक अप्रैल 2016 में बीजिंग में हुई थी।

मंत्रालय के बयान के अनुसार, "दोनों पक्षों ने भारत-चीन द्विपक्षीय समझौते की समीक्षा की और लगातार संपर्क में रहने व सभी क्षेत्रों में अपने संबंधों का विकास करने पर सहमति जताई।

बीजिंग में, चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग से बैठक के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "दोनों देशों ने सदियों पुराने सीमा विवाद को सुलझाने का 'अथक प्रयास' किया है। "

उन्होंने कहा, "हमारे स्टेट काउंसिलर जिएची भारत में सीमा मुद्दे पर अपने भारतीय समकक्ष के साथ विचार साझा करने के लिए वहां है। इसलिए यह तंत्र बहुत अच्छे से काम कर रहा है।"

हुआ ने कहा, "हम उम्मीद करते हैं कि भारतीय पक्ष मौजूदा तंत्र में सुरक्षा व शांति के मुद्दे पर चीनी पक्ष के साथ मिल कर काम करेगा ताकि हम द्विपक्षीय संबंधों के लिए अनुकूल माहौल बना सके।"