कोलकाता : दार्जिलिंग की हिमालयन रेलवे (डीएचआर) या टॉय ट्रेन ने सिलीगुड़ी और सुकना के बीच 35 किलोमीटर के ट्रैक पर प्रायोगिक आधार पर फिर से चलना शुरू कर दिया है।

गोरखालैंड आंदोलन के कारण डीएचआर को 2.5 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। डीएचआर इस ट्रैक की मुकम्मल निरीक्षण कर रहा है।

पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी प्रणव ज्योति शर्मा ने आईएएनएस को बताया, "हमने प्रायोगिक आधार पर सिलीगुड़ी से सुकना के बीच सेवाएं शुरू की हैं। हम जल्द ही सूचित करेंगे और यात्रियों को फिर से इसमें सवार होने की अनुमति मिलेगी।"

शर्मा ने बताया कि विभिन्न विभागों द्वारा सिलीगुड़ी और दार्जिलिंग के बीच के ट्रैक के हर इंच का निरीक्षण किया जा रहा है और उन्हें उम्मीद है कि इन विभागों से हरी झंडी मिलने के बाद 25 अक्टूबर के बाद नियमित रूप से फिर से सेवा बहाल हो जाएगी।

यूनेस्को ने दिसम्बर 1999 में दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे को विश्व धरोहर का दर्जा दिया था।