पटना : कहा जाता है कि राजनीति में जब तल्खी बढ़ी होती है तो विरोधी खेमे के नेताओं की आपसी मुलाकात के भी मायने होते हैं। कुछ ऐसा ही बिहार में दिखाई देने वाला है जब 14 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व नीतीश कुमार के सामने लालू यादव व यशवंत सिंहा हो सकते हैं।

बिहार में राजनीतिक विरोधियों को एकमंच पर लाने का एक ऐसा ही मौका 14 अक्टूबर को देखने को मिल सकता है जब पटना विश्वविद्यालय का शताब्दी समारोह मनाया जाएगा। इसमें मुख्य अतिथि के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शामिल होंगे। साथ पटना विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र रहे आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, यशवंत सिन्हा, शत्रुघ्न सिन्हा के साथ साथ मोदी सरकार में मंत्री रामविलास पासवान, जेपी नड्डा, उपेंद्र कुशवाहा, अश्विनी चौबे और रविशंकर प्रसाद को भी आमंत्रित किया गया है।

बिहार में महागठबंधन की सरकार गिरने के बाद यह पहला मौका होगा जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आरजेडी सुप्रीमो एक साथ किसी कार्यक्रम में नजर आएंगे। इसी साल जुलाई के महीने में आरजेडी और कांग्रेस से गठबंधन तोड़ने के बाद नीतीश कुमार ने बीजेपी के साथ सरकार बना ली थी। उसके बाद से ऐसा कोई मौका नहीं आया था जब नीतीश और लालू एक साथ किसी कार्यक्रम में नजर आए। मगर तस्वीर दिलचस्प तब होगी जब, मंच पर नीतीश और लालू के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी होंगे।

मामले पर पटना विश्वविद्यालय के कुलपति रासबिहारी प्रसाद सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार के साथ लालू प्रसाद को भी इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। हालांकि, मंच पर प्रधानमंत्री मोदी और नीतीश के साथ लालू को जगह मिलती है या नहीं इसको लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है। कुलपति रास बिहारी प्रसाद सिंह ने कहा कि मंच पर आखिरकार किसे जगह मिलेगी, इसका फैसला प्रधानमंत्री कार्यालय करेगा।

गौरतलब है कि पटना विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह में तकरीबन 5000 से भी ज्यादा पूर्व और वर्तमान के छात्रों को आमंत्रित किया गया है, जिसमें कई राजनीतिक हस्तियां शामिल हैं।