हैदराबाद : वाई. वी. राजू एक प्रतिभावान शतरंज खिलाड़ी। दो हजार से ज्यादा रेटिंग प्राप्त दिग्गज खिलाड़ी। राष्ट्रीय स्तर पर अनेक पुरस्कार हासिल करने वाले राजू को गोल्ड मेडल भी मिला। उन दिनों में नगर में जहां कहीं भी शतरंज प्रतिस्पर्धा चल रहा हो, राजू वहां पर दिखाई देता।

हालात ने...

एक जमाने में राजू को रेलने में अच्छी नौकरी थी और शतरंज में अच्छा दबदबा था। मगर आज वो हालत नहीं है। शतरंज में आसान-सी जीत हासिल करने वाला राजू जिंदगी की शतरंज में पूरी तरह से हार गया। ना ही आज उसके पास नौकरी नहीं है और ना ही खेल। उसकी बात कहने वाला कोई नहीं है। हालात ने उसे भिखारी बना दिया।

परिवार...

राजू का जन्म 1969 में प्रकाशम जिले के ओंगोल शहर में हुआ। राजू का बाप एक सरकारी कर्मचारी था। सरकारी नौकरी होने के कारण राज्य के अनेक क्षेत्रों में तबादला होता था। इसके चलते राजू की पढ़ाई अनेक जगहों पर हुई।

राजू ने हैदराबाद के सिटी कॉलेज में डिग्री की पढ़ाई पूरी की। उसे बचपन से शतरंज का शौक था। उसके पिता ने राजू के शौक को देखकर उस जमाने में तीन लाख रुपये मूल्य की शतरंज की पुस्तक खरीदकर दी। इसी लगन से राजू ने राष्ट्रीय स्तर पर अनेक खेलों में अपनी प्रतिभा दिखाई। इसी प्रतिभा पर 1993 में उसे रेलवे में नौकरी मिली।

जिंदगी ने ली करवट...

इसी क्रम में एक दिन राजू के मां-बाप का निधन हो गया। शतरंज में अच्छी प्रतिभा हासिल करने वाले राजू की जिंदगी ने मां-बाप के निधन के बाद ऐसी करवट ली, जिस में से वह उठ न सका। वह बुरे व्यसनों का आदी हो गया। खेल से दूर होता गया। नौकरी में अनुपस्थिति होने लगा। ये देख अधिकारियों ने उसे नौकरी से निकाल दिया। परिणामस्वरूप एक भिखारी बन गया।

शतरंज का शहंशाह...

राजू की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। फिर भी शतरंज में आज भी वह शहंशाह है।

राजू ने 'साक्षी' बताया कि नगर में जहां कहीं पर शतरंज प्रतिस्पर्धा होता है तो वह भाग लेता है और पुरस्कार राशि जीत रहा है। इस पुरस्कार राशि से उसका गुरज-बसर होता है।

शतरंज का सफर...

राजू ने वर्ष 1988 में राजमंड्री में आयोजित राष्ट्रीय शतरंज प्रतिस्पर्धा में एक प्वाइंट से चैंपियनशिप हार गया था। इसी क्रम में वर्ष 1992 में इंटर यूनिवर्सिटी प्रतिस्पर्धा में गोल्ड मेडल और नेशनल प्रतिस्पर्धा में राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल किया है। वर्ष 2000 में आल इंडिया चेस प्रतिस्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता है।

राजू का अड्डा...

ऐसा प्रतिभावान वाई वी राजू इस समय तारनाका चोराहे पर स्थित गणपति मंदिर के सामने भीख मांगकर जीवन बीता रहा है। उसके बिगड़ते स्वास्थ्य को देखकर उसके मित्रों ने दो माह पहले चिकित्सा जांच करवायी। जांच में 'स्किजोफ्रोनिया' (मानसिक रोग) के लक्षण पाये गये। अच्छी चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए ये मित्र पैसा एकट्ठा कर रहे हैं। फिर भी उनकी सहायता कम पड़ रह रही है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि राजू के इलाज के लिए आगे आये।