नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी टीम की तारीफ में नितिन ए. गोखले की किताब 'सिक्योरिंग इंडिया द मोदी वे' खूब चर्चा हो रही है। इस किताब में जिक्र है कि हेमबर्ग में जी-20 सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच मुलाकात में किस तरह डोकलाम विवाद सुलझाया गया।

गोखले की किताब के मुताबिक जी-20 नेताओं की बैठक के दौरान प्रतीक्षालय में ही बिना पूर्व नियोजित कार्यक्रम के एक बैठक हुई। जिसमें डोकलाम विवाद को हल करने के लिए पहल किया गया था। इस किताब का विमोचन उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने किया।

भारतीय राजनयिकों ने भी इसकी पुष्टि की है कि प्रधानमंत्री के शी से अघोषित मुलाकात के बाद चीनी दल चकित रह गया था। किताब में इस बात का जिक्र है कि मोदी ने डोकलाम पर शी जिनपिंग को अहम सुझाव दिया था। मोदी ने जिनपिंग से इतना भर कहा था कि इस विवाद को हल करने के लिए भारत की ओर से NSA अजित डोभाल और चीन के स्टेट काउंसलर यांग जीची आगे आएं और बातचीत करें।

मोदी के ऊपर लिखी किताब का मुखपृष्ठ
मोदी के ऊपर लिखी किताब का मुखपृष्ठ

मोदी के सुझाव को शी जिनपिंग ने तरजीह दी और ये विवाद राजनयिक तरीके से हल हुआ। किताब में इस बात का भी उल्लेख है कि डोकलाम विवाद के दौरान भारतीय दल ने राजदूत विजय गोखले की अगुवाई में चीन में 38 बैठकें की थीं। इस दौरान भारतीय राजनयिक दल को खुद पीएम नरेंद्र मोदी की ओर से भारतीय हितों से समझौता नहीं करने के स्पष्ट निर्देश मिल रहे थे।

इस पूरे विवाद के दौरान भारत ने चीन से लगी सीमा पर दृढ़ता कायम रखी। भारत इस दौरान कूटनीतिक तौर पर तर्कसंगत रहा था। वहीं भारत और चीन ने विवाद सुलझाने के बाद अपने बयानों में विवादित बिंदुओं की कभी चर्चा नहीं की।

दरअसल भारतीय सेना के रोकने के बावजूद चीन ने सड़क निर्माण कार्य 18 जून को नहीं रोका। इसके बाद भारतीय सेना ने इस निर्माण कार्य को रोकने के लिए मानव ऋंखला बनाई थी। अगस्त के पहले पखवाड़े तक तनाव चरम सीमा तक पहुंच गया था। आखिरकार पीएम मोदी की रणनीति कारगर साबित हुई और 28 अगस्त को इस विवाद का पटाक्षेप हुआ।