जोहानिसबर्ग: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की वकालत करते हुए कहा कि सुरक्षा परिषद में बड़ी भूमिका निभाने के लिए एशिया और अफ्रीका के देशों को मिलकर काम करने की आवश्यकता है।

शर्मा ने ''उभरती दुनिया में अफ्रीका एवं एशिया' विषय पर यूनिवसर्टिी ऑफ जोहानिसबर्ग के अफ्रीकन डिप्लोमेसी एंड फोरेन पॉलिसी विभाग द्वारा आयोजित एक समारोह में कहा, ''जब विश्व व्यवस्था को पुन: आकार देने और उसके पुननर्यत्रिंण की बात आती है तो अफ्रीका और एशिया महाद्वीप को इसमें भूमिका निभाने की आवश्यकता है। चीन पहले ही सुरक्षा परिषद का सदस्य है, लेकिन भारत इसका सदस्य नहीं है, जापान इसका सदस्य नहीं है और हमें वहां होना चाहिए।'' शर्मा ने कहा कि एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिकी देशों को व्यापक स्तर पर सहयोग करने के प्रयास करने की आवश्यकता है।

शर्मा ने कहा, ''ब्रिक्स (ब्राजील, रुस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) परिवार में काफी काम किया गया है, जैसे कि हाल में विकास बैंक की स्थापना की गई। इब्सा (भारत, ब्राजील एवं दक्षिण अफ्रीका) ने भी अपनी कुछ ढांचागत सुविधाएं विकसित की है, (हालांकि) हाल में उनका काम कुछ ढीला पड़ा है। ''उन्होंने कहा, ''(इब्सा ) एक बहुत खास पहल है और यह तीन महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक देशों और एशिया, अफ्रीका तथा लातिन अमेरिका की तीन उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच साझेदारी के लिए बहुत है। अब हमें अफ्रीका और एशिया को व्यापक स्तर पर शामिल करना होगा।'' शर्मा ने कहा कि अफ्रीका और एशिया को विकासशील प्रोद्यौगिकियों में साझीदार बनने की आवश्यकता है जिससे खाद्य, स्वास्थ्य और उर्जा सुरक्षा की जरुरतें पूरी होंगी और मजबूत सामाजिक सुरक्षा नेटवर्क बनेगा।'' उन्होंने कहा, ''अफ्रीका और एशिया के बीच कई क्षेत्रों में वास्तव में लाभकारी साझीदारी हो सकती है लेकिन हम सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था पर ध्यान दिए बिना, इस बारे में बात नहीं कर सकते।'' उन्होंने अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच हालिया तनाव का जिक्र करते हुए कहा, ''यह समावेशी और लोकतांत्रिक होना चाहिए, हमें समकालीन दुनिया की वास्तविकताओं का प्रतिनिधित्व करना चाहिए।'' इस बीच, दक्षिण अफ्रीका में भारत की उच्चायुक्त रचिरा कम्बोज ने दक्षिण अफ्रीका और भारत के बीच पुराने बेहतरीन संबंधों को रेखांकित किया और दक्षिण अफ्रीका के पड़ोसी देशों में भारत को व्यापार के लिए पहुंच मुहैया कराने वाले 'भारत-दक्षिण अफ्रीकन कस्टम्स यूनियन' मुक्त व्यापार समझौते का जिक्र करते हुए कहा, ''मुझे लगता है कि सबसे अहम बात इसे अमल में लाना है।''