हैदराबाद : कभी कभी बड़े घराने के लोग अपनी औलाद को जिंदगी का सबक सिखाने के लिए और जिंदगी के दुख दर्द महसूस करने के लिए सड़कों पर एक आम आदमी की तरह छोड़ देते हैं और जब उनकी औलाद इस सबक में खरे उतरते हैं तो ही उन्हें अपना वारिस बनाकर कारोेबार की जिम्मेदारी देते हैं।

कुछ ऐसा ही सबक अपने बेटे को सिखाने की कोशिश की देश के हीरे के सबसे बड़े व्यापारी ने। अपने बेटे के बिना किसी पहचान के 500 रुपए देकर एक माह तक कमाने खाने और जीवन बिताने का लक्ष्य दिया और क्या क्या हुआ उस बेटे के साथ देखिए...

अमेरिका से उच्च शिक्षा प्राप्त कर भारत वापस लौटे अपने बेटे हितार्ध ढोलकिया को इस बात की चुनौती दी कि वह अपने बारे में बिना जानकारी दिये बगैर किसी अन्य शहर में एक आम आदमी की तरह जीवन गुजार कर बताये।

बेटे ने भी पिता की इस चुनौती को स्वीकार कर यह जता दिया कि वह भी एक आम आदमी की तरह जी सकता है। वह व्यक्ति कोई और नही बल्कि गुजरात के सूरत के रहनेवाले मशहूर हीरा व्यापारी घनश्याम ढोलकिया का 23 वर्षीय बेटा हितार्ध ढोलकिया था।

हरिकृष्णा एक्सपोर्ट के अध्यक्ष घनश्याम ढोलकिया का भारत ही नही बल्कि विदेशों में हीरों के कई दुकान है। हजारों करोड़ रुपये के मालिक घनश्याम ढोलकिया का बेटा विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त कर भारत लौटने के बाद यह सोचा कि अब वह अपने पिता के काम में हाथ बंटाएगा, लेकिन इसके विपरीत उसके पिता ने बेटे के समक्ष इस बात की चुनौती रखी कि वह कुछ समय के लिए एक आम आदमी की तरह जिंदगी बिताकर दिखाए।

इसके बाद ही वे इस बात को स्वीकार कर लेंगे कि उनका बेटा काबिल बन गया है। हितार्ध ढोलकिया ने भी अपने पिता की इस चुनौती को स्वीकार कर लिया और मात्र 500 रुपये लेकर सूरत से हैदराबाद के लिए रवाना हो गया।

जुलाई के प्रथम स्प्ताह में हितार्ध ने एक ऐसे शहर में कदम रखा था जिसके बारे में उसे कोई जानकारी नही थी। हैदराबाद आने के साथ ही वह नौकरी की तलाश में जुट गया। वह नौकरी की तलाश में जहां कहीं जाता तो पहले पहचान पत्र, पता, फोन नंबर, आधार कार्ड आदि मांगा जाता, लेकिन उसके पिता ने ना ही फोन दिया था और ना ही कोई पहचान पत्र। इससे वह कुछ समय के लिए परेशान हो गया।

इसके बावजूद उसने हार नही मानी, क्योंकि वह हार मानने के लिए तैयार नहीं था। उसने अगले एक सप्ताह में पूरी जानकारी देने का आश्वासन देकर मेकडोनाल्ड्स फूड कोर्ट, एडीडास शो रूम, चिल्लीस रेस्टारेंट में दिहाड़ी मजदूर के रुप में काम किया। इस तरह एक महीने तक संघर्ष कर कुछ रुपये कमाये।

इस बारे में ताज होटल में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में जानकारी देते हुए हितार्ध ढोलकिया ने अपना अनुभव बताया। उसने बताया कि एक महीने तक वह आम लोगों के साथ जिंदगी गुजार कर काफी अनुभव प्राप्त किया। शायद उसके पिता ने आम लोगों की कठिनाइयों से रुबरू कराने के लिए ही इस बात की चुनौती रखी थी।

इस दौरान वह सीलन भरे कमरे में कुछ समय गुजारा और जमीन पर सोने की आदत डाली। मजदूरों के साथ मिलकर सामान भी ढोया और उनके साथ ही खाना खाता था। इस एक महीने में काफी कुछ सीखने को मिला। सूरत में उनकी फैक्टरी में काम करनेवाले मजदूरों को और क्या सुविधा उपलब्ध करानी होगी इस बारे में जानकारी मिली है। उसने शहर के हर कोने में सीसी कैमरा देखकर आश्चर्य चकित रह गया। उसने कहा कि यदि आम आदमी में जीने की कला हो तो वह आराम से जीवन व्यतीत कर सकता है।

कुछ समय पहले हितार्ध ढोलकिया के चाचा ने भी अपने बेटे को इसी तरह की चुनौती देते हुए केरल भेज दिया था। उल्लेखनीय है कि घनश्याम ढोलकिया ने दीपावली के उपहार स्वरूप अपने कर्मचारियों को 1200 कार और महंगे फ्लैट दे कर चर्चा में आये थे।

संवाददाता सम्मेलन में उपस्थित तेलंगाना गृह मंत्रालय के मुख्य सचिव राजीव त्रिवेदी ने कहा कि हितार्ध के परिवार वालों से काफी पुराना परिचय है। हैदराबाद आने के बाद भी हितार्ध ने ना ही इसकी जानकारी दी और ना ही सहायता मांगी। जिस तरह भगवान श्रीराम को अज्ञातवास भेज दिया गया था उसी तरह घनश्याम ढोलकिया ने अपने बेटे को एक महीने के लिए अज्ञातवास भेज दिया। हर अमीर व्यक्ति को घनश्याम ढोलकिया से सबक सीखनी चाहिए।