पणजी : केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सेना के आलोचकों की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि शायद भारत दुनिया का एकमात्र देश है, जहां उसकी सेना को इतनी आलोचना का सामना करना पड़ता है।

प्रधान ने कहा कि पहले सिर्फ राजनीतिज्ञों की आलोचना की जाती थी, लेकिन यह रुझान अब हमारी सुरक्षा एजेंसियों और सैनिकों तक आ गया जो कठिन स्थितियों में काम करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग सेना की अनुचित आलोचना करते हैं जो उनकी कुर्बानियों से वाकिफ नहीं हैं।

प्रधान ने कहा, ''जो भारतीय सेना की आलोचना करते हैं वह उनकी क्षमता नहीं जानते हैं। वे हर दिन अपनी जान जोखिम में डालते हैं ताकि हम अपने घर में शांति से सो सकें।'' केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री वास्को के निकट भातीय तटरक्षक बल के पोत 'शौर्य' के जलावतरन (कमिशनिंग) के बाद बोल रहे थे।

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प्रधान ने कहा, ''भारत एक लोकतांत्रिक देश है। पहले, सिर्फ राजनीतिज्ञ ही आलोचना का सामना करते थे। अब थलसेना, नौसेना, तटरक्ष और बीएसएफ तक आलोचना का सामना करते हैं।''

उन्होंने कहा, ''यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज हम सेना को समझ नहीं पा रहे और सम्मान नहीं कर पा रहे। हमें उन्हें सम्मान देना चाहिए जिसके वह हकदार हैं। आलोचना होनी चाहिए लेकिन उसके पीछे कारण होना चाहिए।