नई दिल्ली: राष्ट्रपति चुनाव को लेकर सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने बीजेपी उम्मीदवार को समर्थन का एलान कर दिया है। हालांकि इसमें बेटे और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की हामी नहीं है। इससे पार्टी में एक बार फिर कलह की स्थिति पैदा हो सकती है।

यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश को दरकिनार कर मुलायम के इस फैसले पर एक खेमा ऐतराज कर सकता है। हालांकि मुलायम सिंह ने बीजेपी कैंडिडेट को समर्थन के साथ शर्त भी रखी है। वो ये कि कैंडिडेट सभी द्वारा स्वीकार्य और कट्टर भगवा छवि का नहीं होना चाहिए।

गृह मंत्री राजनाथ सिंह और सूचना एवं प्रसारण मंत्री वेंकैया नायडू ने इस मुद्दे पर मुलायम सिंह से मुलाकात की थी। गौरतलब है कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह द्वारा गठित पैनल के सदस्य विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं से मुलाकात करके राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार पर एक राय बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

राजनाथ सिंह और वेंकैया नायडु के साथ बातचीत में मुलायम सिंह बेटे के फैसलों और अखिलेश के पार्टी चलाने के तौर तरीकों पर नाखुशी जाहिर की। मुलायम के रुख से बीजेपी नेता आश्वस्त हैं कि समाजवादी पार्टी का समर्थन उन्हें हासिल होगा।

हालांकि मुलायम के एनडीए कैंडिडेट को समर्थन देने के एलान से विपक्षी दलों को बड़ा झटका लगा है। दरअसल विपक्षी दल एकजुट होकर राष्ट्रपति चुनाव के मद्देनजर बीजेपी को कड़ी टक्कर देने की तैयारी में थे।

बीजेपी नेताओं से मुलाकात में मुलायम ने ए पी जे अब्दुल कलाम को राष्ट्रपति बनवाने में अपनी पहल का भी जिक्र किया। दरअसल दिवंगत डॉक्टर कलाम का नाम राष्ट्रपति के लिए सबसे पहले मुलायम सिंह ने ही लिया था।

समाजवादी खेमे में मौजूदा घमासान के मद्देनजर सूत्रों का दावा है कि अखिलेश यादव पिता की इच्छा के विरुद्ध ही जाएंगे। उम्मीद की जा रही कि अखिलेश का समर्थन गैर एनडीए उम्मीदवार के पक्ष में होगा।