नई दिल्ली : जब भी देश में नए राष्ट्रपति के चुनाव का वक्त आया तब सत्तापक्ष और विपक्ष में आम राय नहीं बन पाई। आम सहमति से देश का मुखिया चुनने की चर्चा व कोशिशें हर बार हुईं पर सफलता केवल एकबार मिली। इसके अलावा हर बार राष्ट्रपति चुनाव का इतिहास चुनावी मुकाबले का ही गवाह रहा है। राष्ट्रपति के अब तक 14 चुनावों में केवल एक बार ही नीलम संजीव रेड्डी निर्विरोध राष्ट्रपति चुने गए हैं।

डा. राजेंद्र प्रसाद से लेकर सर्वपल्ली राधाकृष्णन और सर्वाधिक लोकप्रिय एपीजे अब्दुल कलाम जैसी हस्तियों को भी राष्ट्रपति बनने के लिए चुनावी मुकाबले से रुबरू होना पड़ा। ऐसे में आम सहमति के विपक्ष के दांव में ज्यादा दम नहीं दिखाई दे रहा।

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राष्ट्रपति के लिए 1977 में हुए चुनाव में पहली बार नीलम संजीव रेड्डी के मुकाबले कोई नहीं उतरा। आपातकाल के तत्काल बाद हुए चुनाव में इंदिरा गांधी की अगुवाई में कांग्रेस की पराजय हुई थी। जनता सरकार ने सातवें राष्ट्रपति के लिए रेड्डी को उम्मीदवार बनाया। तब विपक्ष में रही कांग्रेस ने प्रत्याशी नहीं उतारा। इस तरह रेड्डी निर्विरोध चुने जाने वाले पहले राष्ट्रपति बने और आज भी यह रिकार्ड उनके ही नाम है।

राजेन्द्र प्रसाद के खिलाफ 4 उम्मीदवार

1952 में हुए पहले राष्ट्रपति चुनाव में डा राजेंद्र प्रसाद की बड़ी शख्सियत के बावजूद उनके मुकाबले में चार उम्मीदवार उतरे। डा. प्रसाद को 5 लाख से अधिक वोट मिले थे और उनके निकटतम प्रत्याशी केटी शाह को 92 हजार से अधिक मत हासिल हुए थे।

दूसरी बार में भी दो ने दी चुनौती

राजेंद्र बाबू दूसरी बार 1957 में करीब 4.60 लाख वोट पाकर आसानी से राष्ट्रपति चुने गए मगर चुनाव हुए क्योंकि उनके मुकाबले दो उम्मीदवार मैदान में थे जिन्हें दो से ढाई हजार वोट मिले।

राधाकृष्णन के खिलाफ उतरे दो प्रत्याशी

राष्ट्रपति पद के तीसरे चुनाव में सर्वपल्ली राधाकृष्णन जैसी शख्सियत पर व्यापक सहमति थी मगर तब भी चुनाव हुए। चुनाव में उन्हें 5.53 लाख से अधिक वोट मिले। उनके निकट उम्मीदवार चौधरी हरीराम को 6 हजार से कुछ ज्यादा और एक अन्य प्रत्याशी यमुना प्रसाद त्रिशुलिया को 3 हजार से अधिक वोट मिले थे।

17 उम्मीदवारों ने आजमाया हाथ

चौथे राष्ट्रपति चुनाव का मुकाबला सबसे कांटे का रहा तब 1967 में राष्ट्रपति चुने गए डा. जाकिर हुसैन को 4 लाख 71 हजार से अधिक तो दूसरे नंबर पर रहे कोटा सुब्बाराव को 3 लाख 63 हजार से अधिक वोट मिले। वैसे इस चुनाव में वैसे 17 उम्मीदवार थे जिनमें से 9 को एक भी वोट नहीं मिला था।

वीवी गिरी को कड़ी चुनौती

जाकिर हुसैन के निधन के कारण पांचवे राष्ट्रपति का चुनाव 1969 में ही कराना और तब मुकाबला और भी कांटे का रहा। राष्ट्रपति चुने गए वीवी गिरि को 4 लाख एक हजार से ज्यादा तो दूसरे नंबर पर रहे नीलम संजीव रेड्डी को 3.13 लाख से ज्यादा वोट मिले। सीडी देशमुख ने भी एक लाख से ज्यादा और चंद्रदत सेनानी को करीब 6 हजार वोट हासिल हुए थे।

फखरूद्दीन अली को त्रिदीब ने दी चुनौती

1974 में हुए छठे राष्ट्रपति चुनाव में फखरूद्दीन अली अहमद को भी एकमात्र उम्मीदवार त्रिदीब चौधरी का सामना करना पड़ा। अहमद को 7.65 लाख तो चौधरी को 1.89 लाख से अधिक वोट मिले।

इकलौते निर्विरोध राष्ट्रपति

फखरूद्दीन अली अहमद के निधन की वजह से 1977 में जनता सरकार के आते ही राष्ट्रपति चुनाव कराने पड़े और नीलम संजीव रेड्डी सातवें निर्विरोध राष्ट्रपति चुने गए। तब विपक्ष में रही कांग्रेस ने प्रत्याशी नहीं उतारा था।

जैल सिंंह को भी खन्ना ने ललकारा

ज्ञानी जैल सिंह 7.54 लाख वोट हासिल कर 1982 में देश के आठवें राष्ट्रपति चुने गए। तब भी विपक्ष के एकमात्र उम्मीदवार एचआर खन्ना मैदान में थे और उन्हें 2.82 लाख से अधिक वोट मिले।

आर वेंकटरमन के खिलाफ दो प्रत्याशी

1987 में 7.40 लाख वोट के साथ नवें राष्ट्रपति चुनाव गए आर वेंकटरमन के मुकाबले दो उम्मीदवार थे जिनमें वी कृष्णन अय्यर को 2.81 लाख वोट हासिल हुए थे।

शंकर दयाल शर्मा को भी मिली थी चुनौती

दसवें राष्ट्रपति बने शंकर दयाल शर्मा को 1992 के चुनाव में 6.75 लाख तो उनके निकटस्थ जीजी स्वेल को 3.46 लाख से अधिक मत हासिल हुए और तब मुकाबले में उतरे राम जेठमलानी को 2700 से कुछ अधिक वोट मिले थे।

कलाम के खिलाफ लक्ष्मी सहगल

ग्यारहवें राष्ट्रपति के रूप में डॉ एपीजे अब्दुल कलाम, 25 जुलाई को राष्ट्रपति बने। कुल दो प्रत्याशियों में कलाम को 9,22,884 वोट मिले। वहीं लेफ्ट समर्थित उम्मीदवार कैप्टन लक्ष्मी सहगल को 1,07,366 मत मिले। वो ऐसे पहले राष्ट्रपति रहे हैं जिनका राजनीति से कभी दूर का भी संबंध नहीं रहा।

पहली महिला राष्ट्रपति को भी चुनौती

प्रतिभा पाटिल भारत की 12वीं तथा इस पद को सुशोभीत करने वाली पहली महिला राष्ट्रपति बनीं। उन्होंने 25 जुलाई 2007 को पद व गोपनीयता की शपथ ली थी। इस चुनाव में प्रतिभा पाटिल को 6,38,116 मत मिले थे जबकि भाजपा समर्थित भैरोसिंह शेखावत को 3,31306 मत मिले थे।

मुखर्जी को संगमा ने दी टक्कर

प्रणव मुखर्जी देश के 13वें राष्ट्रपति बने। प्रणव मुखर्जी ने अपने प्रतिद्वंद्वी पी.ए. संगमा को भारी अंतर से हराया है। प्रणव मुखर्जी को 7,13,763 वोट, जबकि संगमा को 3,13,987 वोट मिले।

अबकी बार भी कुछ ऐसे ही हालात बन रहे हैं, जिसमें किसी को लेकर सहमति बनती नहीं दिख रही है।