हैदराबाद: हैदराबादी बिरयानी के बारे में किसी को अलग से कुछ भी कहने की जरूरत नहीं है। देश-विदेश के लोग, फिल्मी सितारे, क्रिकेटर्स, बड़े-बड़े उद्योगपति और हर वर्ग के लोग जब कभी हैदराबाद आते हैं तो बिना बिरयानी खाये वापस नहीं लौटते। लेकिन इतनी मशहूर बिरयानी एक मामले में फेल हो गयी है।

पहली बार निजाम नवाबों ने बिरयानी को दुनिया से परिचय कराया था। मगर इस प्रसिद्ध बिरयानी जियोग्राफिकल आइडेंटिफिकेशन (जीआई) टैग को हासिल करने में नाकाम रही। इस टैग के लिए हैदराबाद असोसिएशन आफ बिरयानी मेकर्स ने आवेदन किया था, मगर वो बिरयानी के ऐतिहासिक मूल दस्तावेज पेश करने में नाकाम रहे। परिणामस्वरूप हैदराबाद बिरयानी को टैग नहीं मिल सका।

ज्ञातव्य है कि टैग प्राप्त करने के लिए कोई भी उत्पाद एक विशेष जगह पर ही उपलब्ध होने या मिलने के सबूत पेश करना जरूरी है। तब जाकर जीआई टैग दिया जाता/मिलता है। जो इस टैग को प्राप्त करता है उसके सिवाय कोई अन्य इसका उपयोग नहीं कर सकता।

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हैदराबादी बिरयानी को जीआई टैग के लिए बिरयानी असोसिएशन ने वर्ष 2009 में आवेदन किया था। इसके चलते जीआई ने इस प्रसिद्ध बिरयानी से जुड़े ऐतिहासिक सबूत (गेजिट पब्लिकेशन्स जैसे) हो तो पेश करने को कहा था। मगर असोसिएशन सबूत पेश करने में नाकाम रही।

अगस्त 2010 में भी सबूत/दस्तावेज को लेकर फिर चर्चा चली। तब भी जीआई ने सबूत पेश करने को कहा गया। मगर बिरयानी असोसिएशन ने तब भी किसी प्रकार का जवाब जीआई को नहीं दिया। वर्ष 2013 में जीआई ने फिर से हैदराबाद बिरयानी असोसिएशन को पत्र लिखा कि सबूत दस्तावेज पेश करें। फिर भी असोसिएशन ने कोई उत्तर नहीं दिया। मई 2016 में एक बार फिर जीआई ने पत्र लिखा। मगर इसका भी असोसिएशन ने जवाब नहीं दिया। जीआई ने 23 जनवरी एक बार फिर असोसिएशन को कारण बताओ नोटिस जारी किया। इस बार भी हैदराबादी बिरयानी असोसिएशन मौन धारण कर बैठी। परिणामस्वरूप जीआई ने असोसिएशन के आवेदन को ठुकरा दिया। इस प्रकार हैदराबादी बिरयानी को जीआई टैग नहीं मिल सका।