पटना : बिहार में विधान परिषद की चार सीटों के बंटवारे को लेकर महागठबंधन के भीतर अनबन की स्थिति बन गई है. इन सीटों पर नौ मार्च को चुनाव होना है और कांग्रेस को एक भी सीट देने से मना कर दिया गया है।
महागठबंधन के भीतर जदयू और राजद दो-दो सीटों पर चुनाव लड रही हैं जबकि कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली है. यह अनबन महागठबंधन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि राजग में भी यही स्थिति है जहां रामविलास पासवान की लोजपा गया अध्यापक सीट पर राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (आरएलएसपी) के खिलाफ अपना उम्मीदवार खडा करने के लिए दृढ है।
राजग खेमे में जहां भाजपा के पास दो सीटें- गया स्नातक और कोसी अध्यापक हैं, एचएएम के पास सारन स्नातक और आरएलएसपी के पास गया अध्यापक सीट है।
विधान परिषद के चेयरमैन अवधेश नारायण सिंह लगातार तीसरी बार गया स्नातक सीट से पुनर्निर्वाचन की कोशिश में हैं. उन्हें राजद के पुनीत सिंह से चुनौती मिल रही है.
राज्य कांग्रेस अध्यक्ष और मंत्री अशोक चौधरी ने संवाददाताओं को बताया कि ‘‘नामांकन 20 फरवरी तक है और यह देखने के लिए कि उनकी पार्टी क्या करती है, इंतजार करें।''
कांग्रेस विधायक दल के नेता सदानंद सिंह खुलकर सामने आए और उन्होंने ‘गठबंधन धर्म' को लेकर शिकायत की.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस का गया स्नातक सीट पर उचित दावा है जहां इसके उम्मीदवार अजय सिंह पिछली बार दूसरे पायदान पर रहे थे और उन्हें यह मिलना चाहिए। कहलगांव से आठ बार विधायक रहे सिंह ने जदयू और राजद से इस पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है।

विधान परिषद चुनाव में कोई भी सीट दिए जाने से मना करने पर कांग्रेस के असंतोष के बारे में पूछे जाने पर राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद ने आज संवाददाताओं को बताया कि चूंकि सीटें केवल चार हैं।‘‘ राजद और जदयू ने दो-दो उम्मीदवार खडे किए हैं. जब और सीटें खाली होंगी, तब हम कांग्रेस को उसमें व्यवस्थित करेंगे।'' राजग खेमे के भीतर चल रही चर्चा पर भाजपा के मुख्य प्रवक्ता बिनोद नारायण झा ने पीटीआई को बताया।‘‘यह कोई बडा मुद्दा नहीं है। राजग नेतृत्व अगले दो-चार दिनों में गठबंधन के साझीदारों के बीच एकजुटता पैदा करेगा।सभी सीटों पर राजग और इस महागठबंधन के बीच आमने-सामने का मुकाबला होगा।''