हैदराबाद। चारमीनार हैदराबाद की ऐतिहासिक धरोहर है। चारमीनार के ऊपर चढ़कर हैदराबाद शहर को देखने की अनुभूति कुछ अलग ही होती है। हालांकि चारमीनार पर चढ़कर शहर देखने का मजा अब दूभर होगा, क्योंकि बैरिकेडिंग लगाने की मंजूरी मिल गई है।

दरअसल सेल्फी लेने के चक्कर में लोग दीवार के किनारे तक जाने लगे हैं। जिससे दुर्घटनाओं का अंदेशा हमेशा बना रहता है। फिलहाल लकड़ियों का अस्थाई बैरिकेडिंग लगा है। वहीं लोहे की बैरिकेडिंग लगाने के लिए केंद्र सरकार से मंजूरी मिल गई है। जिसके बाद यहां सेल्फी लेना संभव नहीं हो पाएगा।

एक अधिकारी के मुताबिक हर दिन करीब साढ़े पांच हजार पर्यटक चारमीनार का दीदार करने आते हैं। जिनमें ज्यादातर लोग सेल्फी लेने की कोशिश करते हैं। सुरक्षाकर्मियों के रोकने पर लोग झकड़़ने पर उतारू हो जाते हैं।

इससे पहले साल 1986 में एक ही परिवार के चार सदस्यों ने चारमीनार के ऊपर से कूदकर आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद चारमीनार में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया था। वर्ष 2000 में पर्यटकों के लिए फिर से खोला गया। वर्ष 2006 में एक महिला ने चारमीनार से कूदकर आत्महत्या कर ली थी। 2007 में एक व्यक्ति को आत्महत्या का प्रयास करते हुए सुरक्षा कर्मी ने रोका था। वर्ष 2009 में एक व्यक्ति ने 16 वर्षीय बच्ची को चारमीनार के ऊपर से ढकेल दिया था, जिसकी इलाज के दौरान मौत हो गयी थी।

सुरक्षा कर्मियों का मानना है कि लोगों के सेल्फी शौक के चलते वे हमेशा आशंकित रहते हैं कि कहीं कोई गिर न जाय। लोहे की बैरिकेडिंग लगने के बाद लोग खुद ब खुद ऐसा नहीं कर पाएंगे।