नई दिल्ली : सर्वोच्च अदालत ने बहुचर्चित सहारा-बिड़ला डायरी मामले में दायर जनहित याचिका को ख़ारिज कर दिया है। ये याचिका सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने दायर करते हुए इन डायरियों के बारे में जांच की मांग की थी।

बताया जाता है कि ये डायरियां नवंबर 2014 में आयकर विभाग के एक छापे में बरामद की गई थीं जिनमें कथित तौर पर राजनेताओं को पैसे दिए गए थे जिनमें गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई और लोगों के नाम शामिल थे। राहुल गांधी ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री मोदी से जवाब मांगा था

मगर सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण की याचिका को ख़ारिज करते हुए कहा कि जिन डायरियों की बात की जा रही है उन्हें सबूत नहीं माना जा सकता।

प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने फ़ैसले के बाद कहा,"ये फ़ैसला दिखाता है कि कई बार जब प्रभावशाली लोग आते हैं तो सुप्रीम कोर्ट का नज़रिया उन्हीं मुद्दों को लेकर बदल जाता है जिन पर उन्होंने पहले दूसरी तरह के फ़ैसले दिए।"

उन्होंने कहा कि इस फ़ैसले के बाद भी आरोपों का जो एक बादल है वो छंटेगा नहीं।

उल्लेखनीय है कि इन्हीं डायरियों का नाम लेते हुए पिछले महीने दिसंबर में राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया था कि उनका नाम कुछ उद्योगपतियों की डायरी में लिखा मिला था जिनसे उन्होंने पैसे भी लिए।

उन्होंने दावा किया था कि आयकर विभाग के पास इससे संबंधित काग़जात मौजूद हैं। इन्हीं में सहारा ग्रुप के लोगों द्वारा नरेंद्र मोदी को छह महीने में कुल नौ बार पैसा दिए जाने की बात लिखी पाई गई थी।

भारतीय जनता पार्टी ने इन आरोपों को एक सिरे से ख़ारिज करते हुए कहा था कि राहुल गांधी ने 'गंगा के बराबर पवित्र' नरेंद्र मोदी पर ग़लत आरोप लगाए हैं।