वाशिंगटन : अमेरिकी रक्षा विभाग ने हाल ही में झुंडों के रूप में उड़ने वाले माइक्रो-ड्रोन का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। कैलिफोर्निया के चाइना लेक में किए गए इनके परीक्षण को पिछले रविवार सीबीएस न्यूज़ प्रोग्राम में दिखाया गया। स्ट्रैटजिक कैपबिलिटीस ऑफिस (एससीओ) द्वारा निर्मित सूक्ष्म ड्रोनों का यह झुंड या यूं कहें कि ड्रोन सेना दुनिया में अनोखी है और बहुत बड़ी भी है। ये टिड्डियों के झुंड की तरह युद्ध अभियानों में भाग लेते हैं। तीन एफ/ए-18 सूपर हॉर्नेट्स द्वारा छोडे गए 103 पेर्डिक्स ड्रोनों ने इस प्रदर्शन में हिस्सा लिया।



इन ड्रोनों में खास बात यह है कि ये सामूहिक तौर पर फैसले लेते हैं और एक साथ उड़ान भरते हुए भी अनुकूल फॉर्मेशन अपना लेते हैं। और ये सेल्फ हीलिंग भी होते हैं यानी अपने अंदर उत्पन्न होने वाली समस्याओं का खुद ही निदान कर लेते हैं।

इस मौके पर रक्षा मंत्री ऐश कार्टर ने अधिकारियों को बधाई दी। कार्टर वो शख़्स हैं जिन्होंने 2012 में एससीओ का गठन किया था। उनका मानना है कि तकनीकी नज़रिए से यह बहुत ही उमदा आविष्कार है और यह अमेरिका को दूसरों की तुलना में बहुत आगे रखता है।

एससीओ के निर्देशक विलियम रोपर ने बताया, "युद्ध के पेचीदा स्वभाव को देखते हुए पेर्डिक्स पहले से प्रोग्राम किए हुए ड्रोन नहीं होते हैं, बल्कि यह एक सामूहिक जीवप्रणाली जैसी है जिसमें दिमाग का एक हिस्सा निर्णय ले लेता है और इनमें परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने की क्षमता बिल्कुल ऐसी होती है जो कुदरत में कीटों के झुंड में दिखाई देती है। पेर्डिक्स में हर इकाई दूसरी इकाई के साथ कम्युनिकेट करती है। इस झुंड में कोई नेता नहीं होता और इस झुंड में कोई भी ड्रोन खुशी से शामिल हो सकता है और बाहर भी जा सकता है।"

इनके सफलतापूर्वक प्रदर्शन से यह उदाहरण मिल जाता है कि पेंटागन अब अपने युद्ध अभियानों में छोटी, सस्ती और स्वशासी प्रणालियों का इस्तेमाल पर जोर दे रहा है जो एक समय भारी और महंगी व्यवस्थाओं पर ज्यादा निर्भर था।

रोपर ने जोर देकर कहा, "रक्षा विभाग यह मानकर चल रहा है कि भविष्य की युद्ध प्रणालियों में मनुष्य हमेशा लूप में रहेंगे और माइक्रो-ड्रोन और अन्य मशीनें मनुष्यों को बेहतर और त्वरित फैसले लेने में मदद करेंगी।"