नई दिल्ली: केंद्र सरकार आज जीएसटी दिवस मना रही है। इसको लेकर मुख्य कार्यक्रम की खासियत ये रही कि इसमें दो दो वित्त मंत्री शामिल हुए। मंच पर तो पीयूष गोयल मौजूद रहे जबकि अरुण जेटली ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उपस्थित लोगों को संबोधित किया।

दरअसल बीते साल 30 जून 2017 की मध्यरात्रि से जीएसटी लागू किया गया था। इसके लिए संसद के सेंट्रल हॉल में विशेष सत्र बुलाया गया था। इसे देश का अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक सुधार होने का दावा किया जा रहा था। हालांकि जीएसटी को लेकर कई आपत्तियां भी दर्ज की गई हैं। सरकार ने भी माना कि समय के साथ नियमों में बदलाव किया जाएगा।

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह में बीते महीने जून में 1,600 करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज की गई। केंद्र सरकार ने रविवार को कहा कि जून में जीएसटी संग्रह का आंकड़ा 95,000 करोड़ रुपये को पार कर गया।

देश में नई अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था जीएसटी लागू होने के एक साल पूरे होने पर आयोजित एक कार्यक्रम में वित्त सचिव हसमुख अधिया ने यहां कहा कि जून में जीएसटी संग्रह 95,610 करोड़ रुपये हुआ जबकि उससे पिछले महीने 94,016 करोड़ रुपये जीएसटी के तहत संग्रह हुआ।

उन्होंने कहा, "जून में जीएसटी संग्रह का आंकड़ा मई के मुकाबले 1,600 करोड़ रुपये बढ़ गया, जोकि नई कर व्यवस्था की मजबूती का प्रमाण है।"

उन्होंने बताया, "अप्रैल में जीएसटी संग्रह 1,03,000 करोड़ रुपये हुआ। जीएसटी राजस्व संग्रह में यह बढ़ोतरी मार्च में वित्त वर्ष की समाप्ति के कारण रही। अन्यथा, जीएसटी संग्रह का मासिक औसत पिछले वित्त वर्ष में 89,885 करोड़ रुपये रहा।"

वित्त सचिव ने बीते महीने कहा था कि अप्रैल के लिए दाखिल रिटर्न की संख्या में भी इजाफा हुआ है और यह बढ़कर 62.46 लाख हो गया जबकि मार्च में 60.47 लाख रिटर्न दाखिल हुए थे। उन्होंने कहा कि अप्रैल में दाखिल रिटर्न में बढ़ोतरी इस बात का भी सूचक है कि वस्तुओं के परिवहन के लिए ई-वे बिल लागू होने से नियमों का अनुपालन बेहतर ढंग से हुआ है।

कार्यक्रम में वीडियो के जरिए संबोधन में वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि जीएसटी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि बीते वित्त वर्ष में जीएसटी के तहत राजस्व संग्रह जीएसटी लागू होने के पूर्व वर्ष की तुलना में 11.9 फीसदी बढ़ गया। उन्होंने कहा, "कर में 1.2 फीसदी की वृद्धि हुई है जोकि पहले अज्ञात था।"