हैदराबाद : वैसे फिल्मी भूतों की कहानी आपने पर्दे पर कई बार देखी होगी, लेकिन फिल्लौरी थोड़ा अलग जरूर है। हालांकि अपने धीमे डायलॉग से फिल्म की रफ्तार धीरे नजर आती है। डायरेक्टर अंशाई लाल ने फिल्लौरी के साथ अच्छा डेब्यू किया है, लेकिन फिल्म के धीमे संवाद फिल्म की कमजोड़ कड़ी हैं।

दरअसल फिल्म की कहानी एक ऐसे भूत के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक पेड़ पर रहती है और धोखे से उसकी शादी 26 साल के कनन (सूरज शर्मा) से हो जाती है। कनन कनाडा से अपनी बचपन की दोस्त अन्नु से शादी करने आता हैं।

घर वालों को पता चलता है कि कनन मांगलिक है और उसे अन्नु से शादी करने से पहले एक पेड़ से शादी करनी होगी। पंडित कहते हैं कि मांगलिक की शादी पेड़ से होने के बाद सभी खतरों का अंत हो जाएगा। इसलिए कनन पेड़ से शादी करने के लिए परिवार के साथ फिल्लौर जाता है।

शादी से एक दिन पहले उसके हाथ पैर ठंडे पड़ जाते हैं और एंट्री होती है उसकी पेड़ से शादी वाली दुल्हन फिल्लौरी (अनुष्का शर्मा) जिसकी खुद की 98 साल पुरानी दुख भरी प्रेम कहानी है। कनन के साथ एक और शख्स है जो फिल्लौरी के अधुरे काम को पूरा करने में उसकी मदद करेगा।

फिल्म में दो लव स्टोरी पैरेलल में एक साथ चलती हैं जो खूबसूरती के साथ दिखाया गया है। बस फिल्म को थोड़े और बेहतरीन तरीके से लिखा जा सकता था।फिल्म की शुरूआत बहुत ही अच्छी है। कई मजेदार सीन हैं। धीरे धीरे कहानी अनुष्का और दिलजीत पर आती है और आपको लगेगा कि फिल्म काफी धीमी चल रही है। फिल्म के क्लाइमैक्स पर और काम करना चाहिए था। क्लाईमैक्स देखकर आपकी फिल्म से जुड़ी जो भी अच्छी यादें होंगी खत्म हो जाएगी।

कनन के रोल में सूरज शर्मा अच्छे लगे हैं और उन्होंने अपने हिस्से के रोल को बखूबी निभाया है। अनुष्का शर्मा का भूत का किरदार बॉलीवुड के बाकी भूतों के किरदार से काफी अलग है। अनुष्का ने भले ही भूत के रोल को अच्छा निभाया हो, लेकिन दर्शकों के लिए ज्यादा कुछ नहीं कर सकीं। दिलजीत दोसांझ सूफी सिंगर के किरदार में एक बार भी आपका दिल जीत लेंगे। उन्होंने कमाल की परफॉर्मेंस दी है।