नई दिल्ली : विदेशी या इम्पोर्टेड चीजों का मोह अब सिर्फ एसी, टीवी, फ्रिज, लैपटॉप, कार या मोबाइल तक सीमित नहीं रह गया है। इस फेहरिस्त में विदेशी या इम्पोर्टेड फलों का नाम भी जुड़ गया है और हाल के बरसों में भारत में विदेशी फलों की मांग में कई गुना का इजाफा हुआ है। शादी-ब्याह में विदेशी फलों का स्टॉल लगाने का चलन तो तेजी से बढ़ा ही है।

साथ ही बेहतर गुणवत्ता की वजह से भी आज उच्च मध्यम वर्ग देसी के बजाय विदेशी फल खाना पसंद करता है। दिलचस्प यह है कि विदेशी फल घर की सजावट का भी हिस्सा बन चुके हैं। उच्च मध्यम वर्ग द्वारा डाइनिंग रूप में डाइनिंग टेबल पर इम्पोर्टेड फल सजाकर रखना एक आम शगल हो गया है। डाइनिंग टेबल पर रखे विदेशी फलों पर उस देश का नाम होता है, जहां से इन्हें आयात किया गया है। इससे मेहमानों पर रौब गालिब किया जा सकता है।

ये भी पढ़ें--

उपवास के दौरान इन बातों का जरूर ध्यान रखें गर्भवती महिलाएं

अदरक, सौंफ उदर विकार में लाभकारी

राजधानी की थोक फल एवं सब्जी मंडी आजादपुर मंडी के व्यापारियों के अनुसार बाजार में दो दर्जन के करीब विदेशी फल आते हैं। न्यूजीलैंड से कीवी तो, अमेरिका और चीन से सेब का आयात होता है। इसके अलावा इमली, अमरूद, अंगूर, खरबूजा, नाशपति, चेरी, आम, खजूर का भी आयात होता है। दिल्ली में विदेशी फल की दैनिक मांग तीन-चार ट्रक प्रतिदिन की है। एक ट्रक में नौ टन फल आते हैं। शादी ब्याह के सीजन में तो यह मांग आठ-दस ट्रकों तक पहुंच जाती है।

आजादपुर मंडी के पूर्व चेयरमैन तथा फेडरेशन आफ फ्रूट एंड वेजिटेबल ट्रेड एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा ने ‘भाषा' से कहा कि आज सामर्थ्यवान लोग इम्पोर्टेड फल ही खाना पसंद करते हैं। इसकी वजह उनकी बेहतर गुणवत्ता है। इसके अलावा घर में विदेशी फल रखना आज स्टेटस सिंबल भी बन चुका है। शर्मा कहते हैं कि आज शायद ही ऐसा कोई शादी-ब्याह का समारोह हो जिनमें इम्पोर्टेड फलों का स्टॉल न हो। लोग अपनी हैसियत के हिसाब से शादी-ब्याह में विदेशी फल रखते हैं।