एस. हनुमंत राव (स्वतंत्र पत्रकार ) की कलम से...

एक सधा हुआ राजनीतिक खिलाड़ी उसे कहते हैं जो अपनी एक चाल से कई दिग्गजों को अपने पीछे चलने पर मजबूर कर दे। कुछ ऐसा ही कारनामा इन दिनों वाईएसआरसीपी के अध्यक्ष वाईएस जगनमोहन रेड्डी ने कर दिखाया है।

आंध्र प्रदेश के लिए स्पेशल केटेगरी स्टेटस की मांग को लेकर जिस तरह से जगनमोहन रेड्डी ने अपना आंदोलन चलाया है और अपनी मांग पर हमेशा कायम रहे, उसको लेकर उनके राज्य में सक्रिय विरोधी दलों में एक अजीब सी बेचैनी देखी जा रही है। पहले तो मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू जैसे दिग्गज नेता को भारतीय जनता पार्टी के साथ चला आ रहा गठबंधन छोड़ना पड़ा तो वहीं आंध्र प्रदेश की राजनीति में अभिनेता से नेता बनकर कूदने वाले पवन कल्याण को भी स्पेशल कैटेगरी स्टेटस के मामले को उठाने पर मजबूर होना पड़ा। हालांकि इन दोनों नेताओं ने इसके पहले कभी भी स्पेशल कैटेगरी स्टेटस को आंध्र प्रदेश की जरूरत नहीं माना और नहीं इसके पहले कभी जोर-शोर से आवाज़ उठायी।

अभी तक तो यही देखा जाता रहा है कि आंध्र प्रदेश की राजनीति में चंद्रबाबू नायडू अपनी मनमानी करते आए हैं और अपनी हर चाल से अपने विरोधियों को पटकनी देते रहे लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है जब चंद्रबाबू नायडू जगनमोहन रेड्डी कि एक सधी राजनीतिक चाल पर गच्चा खा गए उनकी मांग को अपनी मांग बनाकर अपने आप को राजनीतिक पटल पर उभारने की कोशिश में लगने लगे। हालांकि संसद में हंगामा करने से लेकर इस्तीफा देने तक और राज्य में छोटे आंदोलन से लेकर बड़े आंदोलन को चलाने में कभी भी तेलुगू देशम पार्टी के नेता वाईएसआरसीपी को चुनौती देते नजर नहीं आई। स्पेशल केटेगरी स्टेटस पर हर समय टीडीपी वाईएसआरसीपी के पीछे ही चलती नजर आई।

वाईएसआरसीपी के अध्यक्ष जगनमोहन रेड्डी के स्पेशल केटेगरी स्टेटस की मांग के साथ साथ पिछले कई महीनों से चल रही पदयात्रा में मिल रहे समर्थन और उमड़ रही भीड़ से परेशान हैं और उन्हें ऐसा लग रहा है कि वाईएसआरसीपी स्पेशल केटेगरी स्टेटस के मामले को जनभावना से जोड़कर राजनीतिक लाभ ले रही है। इसीलिए अपनी सत्ता को बचाने के लिए विशेष पैकेज की बात को स्पेशल केटेगरी स्टेटस में बदलने के लिए पहले केन्द्र सरकार पर जोर डाला और जब बात नहीं बनी तो अपनी पार्टी के मंत्रियों का इस्तीफा दिलावा दिया।

इसके अलावा चंद्रबाबू नायडू को यह भी महसूस हो रहा है कि जो हवा 2014 के चुनाव के समय उनको दिखाई दे रही थी वह 2019 में नहीं रहने वाली है। ऐसा माना जा रहा है कि 2014 लोकसभा व विधानसभा चुनाव एक साथ होने व अविभाजित आंध्र प्रदेश राज्य के मुख्यमंत्री के रुप कार्य करने के अनुभव के आधार पर बुद्धिजीवियों व हर वर्ग के लोगों ने उन्हें खुलकर सपोर्ट किया था और उनके द्वारा किए गए वायदों पर भरोसा करके वोट तो दे दिया पर सत्ता में काबिज होने के बाद चंद्रबाबू नायडू कई अपनी घोषणाओं को भूल गए तो कई योजनाओं पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे।

एक समय में आंध्र प्रदेश में अपने भारी समर्थन के जरिए भाजपा से केंद्र की सत्ता छीनने वाली कांग्रेस पार्टी भी स्पेशल केटेगरी स्टेटस के मुद्दे पर काफी कमजोर सी दिख रही है। राज्य में कांग्रेस के ज्यादातर नेता या के वाई एस जगनमोहन रेड्डी के साथ चले गए या फिर तेलुगू देशम पार्टी का दामन थाम लिया है। ऐसे में कांग्रेस भी स्पेशल केटेगरी स्टेटस के मामले पर समर्थन देकर राज्य में एक संजीवनी पाना चाह रही है। कांग्रेस को लग रहा है कि इसके जरिए भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ आक्रोश को अपने पक्ष में किया जा सकता है।

भले ही तेलुगू देशम पार्टी, पवन कल्याण की जनसेना या कांग्रेस पार्टी स्पेशल कैटेगरी स्टेटस के मुद्दे को अपने अपने राजनीतिक लाभ के लिए देर से उठाया लेकिन राजनीतिक विश्लेषक तो यही कहते हैं कि वाईएसआरसीपी कांग्रेस के अध्यक्ष वाईएस जगनमोहन रेड्डी ने चंद्रबाबू नायडू, पवन कल्याण और राहुल गांधी जैसे दिग्गज नेताओं को अपने मुद्दे के जरिए अपनी बनाई हुई लकीर पर चलने को मजबूर कर दिया है।