नई दिल्ली : पूर्वोत्तर में कांग्रेस की भले करारी हार हुई हो, लेकिन पार्टी के नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया का मानना है कि 2019 के आम चुनावों के लिए महत्वपूर्ण हिंदी पट्टी में पार्टी के उभार के बहुत मजबूत संकेत हैं।

हाल में मध्यप्रदेश की मुंगावली और कोलारस विधानसभा सीटों पर पार्टी की जीत से उत्साहित उन्होंने कहा कि लोगों ने राज्य में 14 साल के भाजपा शासन को खत्म करने का फैसला कर लिया है, जहां इस साल चुनाव होना है।

मध्यप्रदेश के लिए कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद के अग्रणी उम्मीदवारों में देखे जा रहे सिंधिया ने राज्य में शिवराज सिंह चौहान सरकार को हटाने के लिए ‘‘समान विचार वाले दलों'' से हाथ मिलाने का भी अनुरोध किया। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा कि नगालैंड और त्रिपुरा में विधानसभा चुनाव के परिणाम से ‘धक्का' लगा।

उन्होंने उल्लेख किया कि मेघालय में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन, यह सच है कि भाजपा किसी भी तरह सरकार बनाने में विश्वास रखती है और विधानसभा में महज दो सीट पाने वाली पार्टी ने सरकार बनाने के लिए सारी तिकड़म करने की कोशिश की।''

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हालांकि, उन्होंने ने कहा, ‘‘जब मैं ऐसा कह रहा हूं तो मेरा मानना है कि हिंदी पट्टी में आपके उभरने के बहुत मजबूत संकेत रहे हैं।'' त्रिपुरा और नगालैंड में कांग्रेस का खाता नहीं खुला, जबकि मेघालय में वह सरकार बनाने में नाकाम रही। भाजपा गठबंधन सरकार बनाकर तीनों राज्यों में सत्ता में आयी।

सिंधिया ने कहा कि गुजरात विधानसभा का चुनाव सच में प्रेरक रहा। मध्यप्रदेश में गुना से सांसद सिंधिया ने कहा कि इसके बाद राजस्थान और मध्यप्रदेश के उपचुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल की। उन्होंने कहा, ‘‘ये सभी राज्य कांग्रेस के लिए आगे महत्वपूर्ण होने जा रहे हैं। इसलिए मेरा मानना है कि इन राज्यों में जो राजनीतिक तापमान और लक्षण दिखे हैं, वह कांग्रेस के लिए बहुत महत्वपूर्ण संकेत है।''

हालांकि, लोकसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक सिंधिया ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं को बहुत काम करना होगा क्योंकि ‘‘हमें अपने प्रतिद्वंद्वियों को हल्के में नहीं लेना है।'' सिंधिया ने मध्यप्रदेश में पार्टी के भीतर गुटबंदी को भी खारिज करते हुए कहा कि राज्य में कांग्रेस एकजुट है।

यह पूछे जाने पर कि क्या कांग्रेस को मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री उम्मीदवार का नाम घोषित करना चाहिए, सिंधिया ने कहा, ‘‘मैं इस मुद्दे पर नहीं बोलने वाला क्योंकि मुझे नहीं लगता कि यह बोलना उपयुक्त होगा। यह फैसला महासचिव और कांग्रेस आलाकमान को करना है।''