नई दिल्ली : वैशाली में मिली भगवान बुद्ध की अस्थियों को वहां संग्रहालय बनाकर स्थापित करने का कार्य पिछले चार वर्षो से बेहद धीमी रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। इस दिशा में 72 एकड़ जमीन अधिग्रहित करने और धन का आवंटन किये जाने से इस बारे में उम्मीद बंधी है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में कहा कि भगवान बुद्ध के अस्थिकलश को फिर से वैशाली में स्थापित किया जायेगा। इसके लिए वैशाली में स्तूप का निर्माण होगा एवं बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय भी बनाया जायेगा।

उन्होंने कहा था कि बुद्ध की अस्थियां वैशाली से प्राप्त हुई थीं और फिलहाल उन्हें पटना के संग्रहालय में रखा गया है। वैशाली वह स्थान है, जहां बुद्ध ने पहली बार संघ में महिलाओं को प्रवेश दिया था।

पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री एवं वैशाली के पूर्व सांसद रघुवंश प्रसाद सिंह ने 'भाषा ' से कहा कि वैशाली में संग्रहालय स्थापित करने की जन आकांक्षा और अदालत का निर्णय सर्वोपरि है। इस दिशा में 72 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई है। इस संबंध में 154 करोड़ रुपये की परियोजना तैयार की गई है। इसके तहत पत्थर का स्तूप बनाया जायेगा और यह आईआईटी की देखरेख में करने का प्रस्ताव किया गया है।

बिहार के पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के एक अधकिारी ने बताया कि इस बारे में टेंडर की प्रक्रिया चल रही है।

बिहार सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, फरवरी 2013 में राज्य कैबिनेट ने संग्रहालय का निर्माण करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी।

वैशाली से पूर्व सांसद एवं सत्तारुढ़ घटक राजद के उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा कि 1958 में खुदाई में वैशाली में मिली भगवान बुद्ध की अस्थियां वैशाली में संग्रहालय बना कर स्थापित करने संबंधी पटना हाई कोर्ट के सात दिसंबर 2010 के फैसले को एक साल में लागू करने की बिहार सरकार से अपेक्षा की गई थी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार को भू अर्जन के बाद तीन महीने में भारत सरकार के संस्कृति विभाग से परियोजना का प्राक्कलन भेजकर इस उद्देश्य के लिए सहायता राशि प्राप्त करनी थी। भारत सरकार संग्रहालय की स्थापना के लिए खर्च देने को तैयार है और इस उद्देश्य के लिए प्रावधान भी किया है।