उदयपुर (राजस्थान): गायन के क्षेत्र में शुरुआती संघर्षो के बाद सफलता की बुलंदियां छू चुके प्रतिष्ठित गायक कैलाश खेर का मानना है कि बाजारीकरण के इस दौर में भी सूफी संगीत का वजूद बना हुआ है और इसकी एक बड़ी वजह युवाओं का इसके प्रति बढ़ता रुझान है।

पंचम स्वर में गाने वाले गायक का कहना है कि लोगों का संगीत के प्रति दृष्टिकोण बदल रहा है। अब संगीतकार को गंभीरता से लिया जा रहा है, जबकि पहले ऐसा नहीं था।

उदयपुर में विश्व संगीत महोत्सव में पहुंचे कैलाश खेर ने आईएएनएस के साथ साक्षात्कार में कहा, "पहले हमारे देश में संगीत को गंभीरता और सम्मान के साथ नहीं देखा जाता था। संगीत को प्रोत्साहन नहीं मिलता था। वजह यह थी कि संगीत क्षेत्र में कोई निश्चित व्यवस्था नहीं थी। यहां 20 साल के अनुभव के बाद भी काम मिलने की गारंटी नहीं होती। इस क्षेत्र में प्रशिक्षण की कोई कमी नहीं है, नए गायकों की कतार लगी है, लेकिन बाजार में मांग नहीं है।"

कैलाश संगीत क्षेत्र में आए बदलावों के बारे में पूछने पर कहते हैं, "भारत ऋषियों, मुनियों और विद्वानों का देश रहा है। यहां के लोग बहुत बुद्धिमान हैं। यह देश चाणक्य, कौटिल्य, चंद्रगुप्त, विवेकानंद और बुद्ध का है तो यहां फूहड़ चीजें लोगों को पसंद आए, ऐसा हो ही नहीं सकता। लेकिन देखिए कि फूहड़ चीजों का बाजारीकरण हो रहा है। इस बाजारीकरण के दौर में खराब चीजों और उत्पादों को मार्केटिंग के जरिए बाजार में उतारा जा रहा है तो इसमें लोगों की गलती कहां है। अच्छा संगीत भी बन रहा है, लेकिन फूहड़ संगीत की मार्केटिंग भी जोरों पर है।"

वह कहते हैं कि यह कहना कि युवाओं को शोर-शराबा और फूहड़ संगीत पसंद है, सही नहीं है। सूफी संगीतों के दीवानों की गिनती हो तो उसमें युवा शीर्ष पर होंगे।

बाजारीकरण और फूहड़ता के इस दौर में सूफी संगीत का वजूद बरकरार है और यह निरंतर लोकप्रिय भी हो रहा है। इसकी वजह बताते हुए कैलाश कहते हैं, "सूफी संगीत निर्गुण संगीत है जो सदाचार, तहजीब से जीना और जीवन के मूल्यों को व्यक्त करता है। आज का युवा सूफी का दीवाना है। मुझे 11 साल में जो मोहब्बत और सफलता मिली है उसमें सूफी का योगदान है। हालांकि लोग सूफी संगीत के बारे में ज्यादा लिखते नहीं हैं।"

कैलाश खेर कहते हैं, "संगीत समाज में बदलाव का काम कर रहा है। चिकित्सा क्षेत्र में भी संगीत का अहम योगदान है। अमेरिका की कुछ मेडिकल विश्वविद्यालय में कैंसर पीड़ितों के उपचार के लिए भारतीय संगीत का इस्तेमाल हो रहा है। इससे अधिक गौरव की बात और क्या होगी।"

कैलाश खेर ने हाल ही में दो बैंड 'सुरफिरा' और 'इंडीरोज' लांच किए हैं। वह इन बैंड के बारे में कहते हैं, "हमारा नारा 'ईच वन, टीच वन' है। इसके तहत हम प्रतिभाशाली युवाओं को संगीत क्षेत्र में करियर बनाने का मौका दे रहे हैं। इंडीरोज तो खैर एक स्थापित बैंड है जिसे हमने दोबारा लांच किया है।" कैलाश खेर ने कई विज्ञापनों के लिए भी गाना गाया है। वह मोदी सरकार के स्वच्छ भारत अभियान से भी जुड़े हुए हैं और इस अभियान के लिए गाना भी गाया है।

इस बारे में पूछने पर वह कहते हैं, "मुझे संगीत क्षेत्र में पहला मौका विज्ञापनों में गाने (जिंगल) का ही मिला था। मैंने मोटोरोला फोन का जिंगल गाया थ। मैंने बड़े-बड़े ब्रांड के लिए जिंगल गाए हैं। स्वदेशी चीजों के लिए गाकर गौरवान्वित महसूस करते हैं। कुछ लोग बेशक विज्ञापनों में गाने को अलग नजरिए से देखते हैं, लेकिन मुझे अपने स्वदेशी ब्रांडों के लिए गाकर अच्छा लगता है। मैं मानता हूं कि बड़े गायकों का फर्ज है कि वे घरेलू ब्रांड के लिए गाएं।"

कैलाश खेर एक प्रतिष्ठित गायक होने के साथ-साथ एक जागरूक नागरिक भी हैं। वह मौजूदा समय की देश की राजनीति के बारे में कहते हैं, "देश वास्तव में बदल रहा है जो बदलाव पिछले 70 वर्षों में देखने को नहीं मिले उन्हें पिछले दो सालों में देखने को मिल रहा है। सोशल मीडिया एक बहुत बड़ा हथियार बनकर उभरा है। राजनीति में बदलाव आया है। पहले देश के हालात बहुत खराब थे, राजनीतिक क्षेत्र में क्या चल रहा है, पता ही नहीं चलता था लेकिन अब इसमें सुधार आया है। राजनीति में युवाओं की भागीदारी बढ़ी है जो इस बदलाव का कारण बनी है।"

वह कहते हैं, "मैंने उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी तीनों के लिए जिंगल गाए हैं, लेकिन पहले हालात ये थे कि एक पार्टी के लिए गाना गाते थे तो बाकी पार्टियां बहिष्कार कर देती थीं, अब ऐसा नहीं होता।" (रीतू तोमर)