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105 रनों पर भारत आल आउट, ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी शुरू, ताज़ा स्कोर19/1
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जनता सपा और बसपा से ऊब चुकी है: योगी आदित्यनाथ  
DMK नेता एमके स्टालिन आज दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात करेंगे  

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 उत्तराखंड में ‘शक्तिमान’ भी रहा चुनावी मुद्दा 
चुनावी हलचल

उत्तराखंड में ‘शक्तिमान’ भी रहा चुनावी मुद्दा 

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत राज्य के लोगों से एक के बाद एक वादे करते हैं, लेकिन उन्हें पूरा कभी नहीं करते, क्योंकि उन्होंने शक्तिमान चौक के निर्माण का आश्वासन दिया था, लेकिन अभी तक वहां काम शुरू तक नहीं हो पाया है। यह कहना है एक म्यूनिसिपल स्कूल अध्यापक का है।



सावधानी के साथ होली का आनंद लें
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सावधानी के साथ होली का आनंद लें

होली खेलने के दौरान कड़ी धूप के संपर्क में आने से आपके बाल रूखे हो सकते हैं और नमी खो सकती है, इसलिए तेल जरूर लगाएं, यह आपके बालों के लिए सुरक्षा कवच का काम करेगा और बालों से रंग भी आसानी से निकल जाएगा।

यूपी में कांग्रेस कर रही है ‘हाराकिरी’!
राजनीति

यूपी में कांग्रेस कर रही है ‘हाराकिरी’!

अपने चुनावी अभियान में प्रियंका को आगे न लाकर कांग्रेस पार्टी उत्तर प्रदेश में हाराकिरी यानी खुदकुशी कर रही है। यूपी में जो कुछ हो रहा है वह दो पीढ़ियों के बीच जंग से कम नहीं है।



गर्भनिरोधकों का प्रयोग घटा, आबादी बढ़ी
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गर्भनिरोधकों का प्रयोग घटा, आबादी बढ़ी

देश की आबादी फिलहाल अनुमानत: 1.32 अरब है,जो अगले छह सालों में चीन को पीछे छोड़ देगी और साल 2050 तक 1.70 अरब हो जाएगी, जबकि इस दौरान लाखों महिलाएं असुरक्षित गर्भपात के दौरान जान गंवा सकती हैं।



उप्र चुनाव : बुंदेलखंड में ‘उमा’ बनाम ‘भारती’
चुनावी हलचल

उप्र चुनाव : बुंदेलखंड में ‘उमा’ बनाम ‘भारती’

भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ मंत्री और गेरुवा वस्त्रधारी उमा भारती के प्रभाव को भुनाने में लग गई है तो उसका जवाब देने के लिए कांग्रेस ने पीतांबर वस्त्रधारी और प्रवचनकर्ता साधना भारती को चुनाव प्रचार में उतार दिया है।

न्याय अभी जिंदा है..
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न्याय अभी जिंदा है..

आय से अधिक संपत्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट का मंगलवार को आया फैसला बेहद अहम है। खासकर भ्रष्टाचार के दलदल में गोते लगाने वाले नेताओं को जहां ये गले की फांस लग रहा होगा, वहीं कई को सांप सूंघ गया होगा। 



सूफी संगीत को जिंदा रखे हुए हैं युवा : कैलाश खेर (साक्षात्कार)
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सूफी संगीत को जिंदा रखे हुए हैं युवा : कैलाश खेर (साक्षात्कार)

गायन के क्षेत्र में शुरुआती संघर्षो के बाद सफलता की बुलंदियां छू चुके प्रतिष्ठित गायक कैलाश खेर का मानना है कि बाजारीकरण के इस दौर में भी सूफी संगीत का वजूद बना हुआ है और इसकी एक बड़ी वजह युवाओं का इसके प्रति बढ़ता रुझान है।



स्त्रियां अब सिर्फ ‘किचन’ की बात नहीं करतीं : डॉ. उषा किरण खान
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स्त्रियां अब सिर्फ ‘किचन’ की बात नहीं करतीं : डॉ. उषा किरण खान

लेखिका और पद्मश्री से सम्मानित डॉ. उषा किरण खान का मानना है कि अब स्त्रियां सिर्फ किचन की ही बात नहीं करतीं, बल्कि उनमें साहित्य के प्रति भी अभिरुचि बढ़ी है।

काला गाउन पहन डिग्री लेना शिक्षा का अपमान : महंत अवधेशपुरी 
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काला गाउन पहन डिग्री लेना शिक्षा का अपमान : महंत अवधेशपुरी 

दीक्षांत समारोह में गाउन पहनने की बाध्यता न हो, इस विदेशी पंरपरा को तुरंत खत्म किया जाए। इस मुद्दे को लेकर लंबे समय से अपनी आवाज बुंलद करने वाले मध्यप्रदेश के महंत डॉ. अवधेशपुरी महाराज की मांग पर केंद्र सरकार की विश्वविद्यालय समन्वय समिति ने एक कमेटी का गठन किया। 

पंजाब चुनावों में मुख्य मुद्दे हैं ड्रग्स और बेरोजगारी
चुनावी हलचल

पंजाब चुनावों में मुख्य मुद्दे हैं ड्रग्स और बेरोजगारी

पंजाब विधानसभा के लिए होने वाले चुनावों में जो मुद्दे प्रमुखता से उठाए जा रहे हैं, उससे सत्तारूढ़ गठबंधन को खासी शर्मिंदगी झेलनी पड़ रही है। अकाली दल-भाजपा गठबंधन की लोकप्रियता बुरी तरह कम होने के दो मुख्य कारण हैं: बेरोजगार युवाओं के प्रति उसकी बेरुखी और ड्रग माफिया से निपटने में उसकी नाकामी।



बुंदेलखंड में चुनावी माहौल पर ‘नोटबंदी’ की मार!
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बुंदेलखंड में चुनावी माहौल पर ‘नोटबंदी’ की मार!

बुंदेलखंड वह इलाका है, जिसकी देश और दुनिया में सूखा, समस्याग्रस्त इलाके के तौर पर पहचान है। यह क्षेत्र उत्तर प्रदेश के सात और मध्यप्रदेश के छह जिलों में फैला हुआ है। नोटबंदी से मजदूर, छोटे कारोबारियों और रोज कमाने खाने वालों के कामकाज पर पड़ा असर।



उप्र चुनाव : तिंदवारी में ‘साख’ पर होगा मतदान
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उप्र चुनाव : तिंदवारी में ‘साख’ पर होगा मतदान

उत्तर प्रदेश में बांदा जिले की तिंदवारी विधानसभा सीट पर इस बार फिर किसी दल के समर्थन या विरोध के बजाय उम्मीदवार की ‘साख’ पर चुनाव होने के आसार हैं।



मधुमेह हड्डियों का सबसे बड़ा शत्रु
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मधुमेह हड्डियों का सबसे बड़ा शत्रु

मधुमेह एक ऐसी बीमारी है, जिससे पीड़ित व्यक्ति के शरीर में कई बीमारियों की संभावना बन जाती है। मधुमेह के रोगियों को काफी सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि सावधानी हटते ही दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है। 



बिहार में ‘कट्टे’ की जगह गरज रहे एके-47
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बिहार में ‘कट्टे’ की जगह गरज रहे एके-47

पटना (मनोज पाठक) : बिहार के अपराधियों ने अब कट्टे की जगह अत्याधुनिक एके-47 जैसी राइफलें थाम ली हैं। पिछले कुछ दिनों के दौरान राज्य में घटी हत्या की घटनाएं इस बात की हकीकत बयां कर रही हैं। पुलिस विभाग हालांकि अपराधियों के बीच बढ़ते इस ट्रेंड को खतरनाक बताते हुए सतर्क भी है।

पता है.. पंजाब के चुनावी अभियान में कौन-कौन से जुमले हावी हैं?
चुनावी हलचल

पता है.. पंजाब के चुनावी अभियान में कौन-कौन से जुमले हावी हैं?

चंडीगढ़ (जयदीप सरीन) : ‘दुष्ट’, ‘कुटांगा’ (मारूंगा), ‘लुटेरे’, ‘टोपी वाला’ (आम आदमी पार्टी के लिए), ‘मीसाना’ (धोखेबाज) जैसे शब्द आजकल पंजाब की चुनावी हवा में तैरते महसूस किए जा रहे हैं।

2017 में रियल्टी कारोबार : खरीदारों की होगी बल्ले-बल्ले
व्यापार

2017 में रियल्टी कारोबार : खरीदारों की होगी बल्ले-बल्ले

हम ऐसे दिलचस्प दौर में हैं, जब रियल एस्टेट उद्योग एक बार फिर मंदी के बाद उठ खड़ा हो रहा है। इस उद्योग में नियामकीय हस्तक्षेप से यह अनियमित, असंगठित और विखंडित क्षेत्र से एक संगठित, उम्मीद के मुताबिक, विनियमित क्षेत्र में बदल रहा है।

बुंदेलखंड : बसपा, भाजपा पर भारी पड़ सकता है ‘सपा-कांग्रेस’ गठबंधन!
चुनावी हलचल

बुंदेलखंड : बसपा, भाजपा पर भारी पड़ सकता है ‘सपा-कांग्रेस’ गठबंधन!

उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस में हुए गठबंधन से बुंदेलखंड के बांदा जिले की सदर विधानसभा सीट में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर भारी पड़ सकता है।



छत पर फल, सब्जियों और औषधीय पौधों की खेती
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छत पर फल, सब्जियों और औषधीय पौधों की खेती

छत्तीसगढ़ की किसान पुष्पा साहू ने छत पर खेती कर नवाचारी होने का प्रमाण दिया है। पुष्पा ने अपने घर की छत पर फल, फूल और सब्जियों के साथ औषधीय फसलों की बागवानी तैयार की है। उन्होंने इसे ग्लोबल वार्मिग से बचने का सुगम तरीका भी बताया है।

भारत को तत्काल समान नागरिक कानून की जरूरत : तस्लीमा
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भारत को तत्काल समान नागरिक कानून की जरूरत : तस्लीमा

बांग्लादेशी लेखिका और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की पक्षधर तस्लीमा नसरीन ने सोमवार को कहा कि भारत को समान नागरिक कानून की तत्काल जरूरत है। कट्टरपंथियों की नाराजगी झेलने के बाद तस्लीमा साल 1994 से निर्वासित जीवन जी रही हैं। 

गांधीजी का कद इतना छोटा नहीं : केवीआईसी अध्यक्ष 
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गांधीजी का कद इतना छोटा नहीं : केवीआईसी अध्यक्ष 

खादी ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) की 2017 की डायरियों और कैलेंडर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर छपने से मचा राजनीतिक भूचाल थमने का नाम नहीं ले रहा है।संगठन के अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना कहते हैं कि महात्मा गांधी का कद इतना छोटा नहीं है कि कोई उनका स्थान ले सके।



..तो मतदान का बहिष्कार करेगा ‘दिव्यांग’!
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..तो मतदान का बहिष्कार करेगा ‘दिव्यांग’!

उत्तर प्रदेश में बांदा जिले की बिसंडा थाने की पुलिस द्वारा ‘मिनी गुंडा’ एक्ट में निरुद्ध किए गए तेंदुरा गांव के एक दलित दिव्यांग व्यक्ति ने परिवार सहित मतदान के बहिष्कार करने की घोषणा की है। उसका आरोप है कि पुलिस ने गांव के एक दबंग की शह पर उसे और उसके दो भाइयों को फर्जी तरीके से फंसाया है।

 आरबीआई नहीं बता रहा, अमान्य नोटों का क्या होगा?
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आरबीआई नहीं बता रहा, अमान्य नोटों का क्या होगा?

देश में नोटबंदी (विमुद्रीकरण) का फैसला हुए लगभग ढाई माह गुजर गए हैं, लेकिन रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) अब तक यह तय नहीं कर पाया है कि अमान्य नोटों का निपटान किस तरीके से होगा और इसका ठेका किसे दिया जाएगा? 



लेखकों व सरकार के बीच टकराव हर दौर में रहा है : नासिरा शर्मा (साक्षात्कार)
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लेखकों व सरकार के बीच टकराव हर दौर में रहा है : नासिरा शर्मा (साक्षात्कार)

नई दिल्ली (सोमरिता घोष): हिंदी की प्रख्यात लेखिका और साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता नासिरा शर्मा का मानना है कि 1947 में आजादी के बाद से लेकर अभी तक सांप्रदायिक दंगे होते रहे हैं। उनकी लेखनी का प्रमुख उद्देश्य हिंदू और मुसलमानों के बीच भेदभाव को कम करना है। वह मानती हैं कि लेखकों और सरकार के बीच टकराहट हमेशा से रही है। यह टकराहट किसी विशेष पार्टी या सरकार के साथ नहीं है।



रांगेय राघव यानी हिंदी के शेक्सपीयर (जन्मदिन : 17 जनवरी)
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रांगेय राघव यानी हिंदी के शेक्सपीयर (जन्मदिन : 17 जनवरी)

हिंदी के शेक्सपीयर कहे जाने वाले रांगेय राघव मूल रूप से तमिल भाषी थे। 1942 में बंगाल में आई अकाल पर लिखी गई उनकी रिपोर्ट ‘तूफानों के बीच’ काफी चर्चित रही। उन्होंने कई विदेशी भाषाओं, जैसे जर्मन और फ्रांसीसी साहित्यकारों की रचनाओं का हिंदी में अनुवाद किया। राघव द्वारा की गई शेक्सपीयर की रचनाओं का हिंदी अनुवाद मूल रचना सी प्रतीत होती है, जिसके कारण उन्हें ‘हिंदी के शेक्सपीयर’ की संज्ञा दी गई।

‘उच्च शिक्षा और शोध का भी कायाकल्प कर सकते हैं मोदी’
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‘उच्च शिक्षा और शोध का भी कायाकल्प कर सकते हैं मोदी’

नरेंद्र मोदी सरकार को अब उच्च शिक्षा और शोध बढ़ावा देने वाले विश्वविद्यालय अनुदान आयोग जैसे निकायों के कायाकल्प के लिए उसी तरह की निश्चितता दिखानी चाहिए जैसी उसने नोटबंदी को लेकर दिखाई है। ये बातें एक विख्यात वैज्ञानिक ने कहीं।



दिल्ली : सबसे धनी राज्य में शिक्षकों के आधे पद खाली
समाचार

दिल्ली : सबसे धनी राज्य में शिक्षकों के आधे पद खाली

एक सरकारी स्कूल जिसे 59 शिक्षकों की जरूरत है, वहां केवल दो अस्थाई तौर पर नियुक्त किए गए शिक्षक हैं। यह कहानी किसी दूरदराज के पिछड़े ग्रामीण क्षेत्र की नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की है, जो प्रति व्यक्ति आय के मामले में देश का सबसे धनी राज्य है।



यूपी चुनाव: बहुमत के लिए मुस्लिम मतदाताओं के वोटों की दरकार
समाचार

यूपी चुनाव: बहुमत के लिए मुस्लिम मतदाताओं के वोटों की दरकार

राम मंदिर विवाद और बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद उत्तर प्रदेश में मुसलमानों की 19.3 फीसदी आबादी सियासी तौर पर ज्यादा जागरूक हुई है। माना जाता है कि इन्हीं के हाथों में लखनऊ की चाभी है।

UP के पिछड़े वर्ग के इन वोटरों के हाथ में होगी ‘सत्ता की चाबी’
संपादक की पसंद

UP के पिछड़े वर्ग के इन वोटरों के हाथ में होगी ‘सत्ता की चाबी’

उत्तर प्रदेश की राजनीति में वैसे तो जातीय समीकरण हमेशा अहम रहे हैं, लेकिन बात जब ओबीसी की आती है तो यादव को छोड़कर अन्य जाति कहीं अलग खड़ी नजर आती है।

बसपा के दलित वोटों में सेंध लगाने की कोशिश में अन्य दल, अपना रहे नए फार्मूले
संपादक की पसंद

बसपा के दलित वोटों में सेंध लगाने की कोशिश में अन्य दल, अपना रहे नए फार्मूले

आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में राज्य की कुल आबादी का लगभग 20 प्रतिशत आबादी वाले दलित मतदाता वर्तमान परिवेश में बहुजन समाज पार्टी के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। विकास के इतर पार्टी के सिद्धांत और जाति की राजनीति उत्तर प्रदेश में पिछले लंबे समय से दिखती रही है। यहां के अधिकतर राजनैतिक दल इसका लाभ लेते रहे हैं। 

 भारत 2020 का अक्षय ऊर्जा लक्ष्य चूक जाएगा?
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भारत 2020 का अक्षय ऊर्जा लक्ष्य चूक जाएगा?

पिछले साल अप्रैल में बिजली और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने दोहराया था कि भारत का 2020 तक 100 गीगावॉट सौर ऊर्जा स्थापित करने का लक्ष्य है, जिसे पूरा कर लिया जाएगा। लेकिन इंडियास्पेंड का विश्लेषण दिखाता है कि कमजोर अवसंरचना और सस्ते वित्तीय सहायता के अभाव में सौर ऊर्जा में विस्तार करना चुनौतीपूर्ण है।  



दुनिया छोड़ने के बाद, मेरा योगदान दिखेगा : ओम पुरी
समाचार

दुनिया छोड़ने के बाद, मेरा योगदान दिखेगा : ओम पुरी

ओम पुरी को क्या अपनी मौत का अंदाजा था? क्योंकि एक रात पहले उन्होंने आईएएनएस से कुछ इस तरह की बात की थी। उन्होंने कहा था कि उनका योगदान दुनिया छोड़ने के बाद नजर आएगा।

2017 : चार चीजें जिन पर भारत को ध्यान देने की है जरूरत
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2017 : चार चीजें जिन पर भारत को ध्यान देने की है जरूरत

अक्षय ऊर्जा पर अधिक ध्यान, गांवों में अधिक विश्वसनीय बिजली आपूर्ति, राष्ट्रीय पहचान प्रणाली बन चुके आधार के प्रसार और इंटरनेट के अधिक प्रयोग एवं विस्तार पर इंडियास्पेंड के मुताबिक भारत को 2017 में ध्यान देना चाहिए।

 हिंदी को तकनीक के असर से बचाने की पहल
गेस्ट कॉलम

हिंदी को तकनीक के असर से बचाने की पहल

बदलते दौर में आम आदमी की जिंदगी का हिस्सा बन गई है तकनीक। इससे जहां सुविधाएं पाना आसान हो रहा है तो वहीं भाषा भी इसके असर से बच नहीं पा रही है, इससे भाषा के हिमायती चिंतित हैं। उन्हें लगता है कि किताबों का दूर होना और तकनीक का हावी होना भाषा को कमजोर कर रहा है।

क्या रुक पाएगी धर्म, नस्ल पर वोट बैंक की राजनीति? 
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क्या रुक पाएगी धर्म, नस्ल पर वोट बैंक की राजनीति? 

देश के सर्वोच्च न्यायालय का एक अहम फैसला आया है, जिसके अनुसार भारत में धर्म, नस्ल, जाति और भाषा को आधार मानकर वोट मांगना, भ्रष्ट आचरण माना जाएगा। निश्चित रूप से यह भारत जैसे विविधता और बहुसंस्कृति वाले देश में महत्वपूर्ण है, सुधारवादी है। लेकिन यह कितना कारगर होगा, इसके लिए और इंतजार करना होगा।

 राजनीतिक या व्यावसायिक दल?
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राजनीतिक या व्यावसायिक दल?

किसी भी राजनीतिक दल के गठन का एक ही उद्देश्य होता है, जनहित की रक्षा। जन-जन से जुड़े प्रत्येक मुद्दे को उठाना और उनको हल करवाना ही राजनीतिक दलों का मुख्य उद्देश्य होता है। इसी कारण राजनीतिक दलों को संचालित करने वाले जनप्रतिनिधि कहलाते हैं, यानी जो जनता का प्रतिनिधित्व करे, वही जनप्रतिनिधि कहलाता है। 



मप्र : बालाघाट में खुद को ‘इंसान’ बना रही पुलिस!
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मप्र : बालाघाट में खुद को ‘इंसान’ बना रही पुलिस!

बालाघाट में सामुदायिक पुलिसिंग के तहत पुलिस के जवान व अधिकारी ग्रामीणों के बीच जाकर उनकी न केवल समस्याएं सुनकर सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं

तेलंगाना के 2 साल, पेश कर रहा है तेज प्रगति की मिसाल 
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तेलंगाना के 2 साल, पेश कर रहा है तेज प्रगति की मिसाल 

साल 2016 खत्म होने वाला है। यह देश के नवीनतम राज्य तेलंगाना के विकास का दूसरा साल है। गठन के इतने कम समय के अंदर तेलंगाना ने विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से प्रगति की है।

सपा में चली खूब चली उठा-पटक, बसपा को हुए कई कटु अनुभव
चुनावी हलचल

सपा में चली खूब चली उठा-पटक, बसपा को हुए कई कटु अनुभव

उत्तर प्रदेश में इस साल राजनीतिक सेंसेक्स में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया। आसन्न विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी (सपा) के लिए साल 2016 कटु अनुभव वाला रहा।



बच्चों के लिए कितना सुरक्षित डिब्बाबंद दूध?
गेस्ट कॉलम

बच्चों के लिए कितना सुरक्षित डिब्बाबंद दूध?

सवाल यह है कि जिस देश में शराब की बोतलों पर सुरक्षा मानकों का प्रयोग किया जाता है, वहां डिब्बाबंद दूध पर इसका उल्लेख क्यों नहीं होता?