नई दिल्ली : दुनिया में भारत को फिल्म निर्माण क्षेत्र में शीर्ष देशों में शुमार किया जाता है, लेकिन हैरत की बात यह है कि यहां सिर्फ 8,000 स्क्रीनें हैं, जबकि अमेरिका और चीन में 35,000 स्क्रीन हैं। मिराज सिनेमा के प्रबंध निदेशक अमित शर्मा का कहना है कि भारत सबसे ज्यादा फिल्मों का निर्माण करता है, वह भी अलग-अलग भाषाओं में। यहां आपकी एक फिल्म 70 करोड़ का कलेक्शन करती हैं और वहीं चीन में वह फिल्म 700 करोड़ रुपये कमा लेती है। इससे यह बात साबित हो जाता है कि चीन को फिल्मों को लेकर समझ आपसे ज्यादा है।

उन्होंने कहा, "चीन और अमरीका में 3-4 हफ्तों बाद फिल्में दिखाई जाती हैं और तब भी वो भारत से अच्छा खासा कलेक्शन करती है। इसका मुख्य कारण यही है कि आप लोगों तक थिएटर पहुंचाएं, अगर उनके आसपास ही थिएटर उपलब्ध हों और साथ ही किफायती कीमत हो तो हर कोई अपने घर से निकलकर थिएटर जाकर फिल्म जरूर देखेगा।"

उन्होंने कहा कि आज का दर्शक वर्ग हॉलीवुड की एक्शन और साउथ की फिल्मों को देखना पसंद कर रहा है, जिसके कारण अब बॉलीवुड को अपने मसाला मिक्स मूवीज के जोनर से बहार आकार सोचना पड़ा और इसलिए बॉलीवुड टेक्नोलॉजी, टिकट प्राइस, चॉइस ऑफ मूवीज, बायोग्राफिक और प्रेरणादायक फिल्मों पर प्रमुखता से कार्य कर रहा है।

सिनेमाघरों पर लगने वाले कर के बारे में अमित शर्मा ने आईएएनएस को मुंबई से ईमेल के जरिए बताया, "कर हमेशा से ही चर्चित मसला रहा है। अगर आप 7,500 हजार के पांच सितारा होटल में रहने जाते हैं तो आपको 18 फीसदी जीएसटी का भुगतान करना पड़ता है, लेकिन आप 200 रुपये की टिकट लेकर फिल्म देखने जाते हैं तो आपको 28 फीसदी जीएसटी देना होता है। अगर साल में 200 रुपये का टिकट लेकर 200 करोड़ लोग थिएटर में मूवी देखने जाते हैं तो 200 रुपये के एक प्रोडक्ट पर 28 फीसदी जीएसटी कहां से ठीक लगता है।"

अमित शर्मा ने कहा, "आज भारत की 70 फीसदी आबादी ऐसी हैं, जिसके 10 से 15 किलोमीटर के आसपास कोई थिएटर ही नहीं है। वहां तक अगर आप सिनेमा पहुंचना चाहते हो आपको कहीं न कहीं टैक्स स्लैब के बारे में सोचना पड़ेगा, ताकि सिनेमा कंपनिया छोटे शहरों में भी अपना सिनेमाघर बना पाए। चीन में एंटरटेनमेंट पर केवल पांच फीसदी टैक्स निर्धारित हैं। अब आप इसी बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि भारत जैसा देश जहां सबसे ज्यादा फिल्में निर्मित होती हैं, वहां आप एंटरटेनमेंट पर इतना भारी भरकम टैक्स लगाते हैं, तो कैसे आप चीन की बराबरी भी कर पाएंगे।"

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फिल्म को लेकर विवादों के कारण सिनेमाघरों को निशाना बनाए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा, "ऐसे विवाद पहले भी थे और अब भी हैं। मैं अपने निजी तौर पर कहना चाहता हूं कि यह देश के लिए अच्छी बात नहीं है। आपके पास एक ऐसा बोर्ड है, जो फिल्मों को देखने के बाद ऑन एयर करने का प्रमाणपत्र जारी करता है। इसी को ध्यान में रखकर हम यह देखते हैं कि फिल्म चलानी है या नहीं।"

भारत की तुलना में दूसरे देशों के बाजारों में भारतीय फिल्में ज्यादा कलेक्शन करती हैं, जिस पर मिराज सिनेमा के प्रबंध निदेशक अमित शर्मा ने कहा, "इसका बेहद बड़ा कारण यह कि देश की ज्यादातर आबादी के आसपास कोई थिएटर का न होना। साथ ही किफायती कीमत भी उपलब्ध नहीं होना मुख्य समस्या रही है। जम्मू एवं कश्मीर की बात करें तो जम्मू को छोड़कर कहीं पर आज भी थिएटर नहीं हैं। पूरे पूर्वोत्तर में असम को छोड़कर कहीं भी थिएटर नहीं हैं। कुल मिलाकर 120 ऐसी जगह हैं, जहां आज भी थिएटर नहीं हैं।"

वहीं मिराज सिनेमा की सफलता पर शर्मा ने कहा, "वर्तमान में कंपनी की 84 स्क्रीन हैं। साथ ही आने वाले अगले दो महीने में हम 12 नई स्क्रीन लगाने जा रहे हैं। वित्तवर्ष 2018-2019 में हमारी स्क्रीनों की संख्या 100 हो जाएगी और अगले तीन वर्ष में हम 100 स्क्रीनों को और जोड़ेंगे।"

भारतीय सिनेमा जगत का बदलते स्वरूप को वक्त की मांग कहा जा सकता है, जिसमें भारतीय फिल्मों का स्वभाव, सिनेमा प्रदर्शनी में तकनीक का विस्तार और भारतीय दर्शकों की बदलती मांग मुख्य कारण हैं।

उन्होंने कहा कि आज का दर्शक वर्ग हॉलीवुड की एक्शन और साउथ की फिल्मों को देखना पसंद कर रहा है, जिसके कारण अब बॉलीवुड को अपने मसाला मिक्स मूवीज के जोनर से बहार आकार सोचना पड़ा और इसलिए बॉलीवुड टेक्नोलॉजी, टिकट प्राइस, चॉइस ऑफ मूवीज, बायोग्राफिक और प्रेरणादायक फिल्मों पर प्रमुखता से कार्य कर रहा है।