ये कहानी है एक ऐसे शख्स की जो अपनी पत्नी औरतों वाली बात' यानी मेंस्ट्रुअल हाइजीन के मुद्दे को लेकर इतना ज्यादा परेशान हो जाता है कि इस समस्या के हल के लिए खुद सैनिटरी पैड बनाने की ठान लेता है, इस दौरान उसको सैकड़ों परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है, लेकिन वो फिर भी अपने इरादों से पीछे नहीं भागता न ही अपने निर्णय को वो कमजोर होने देता है, वो लड़ता है, समाज से, उनकी सोच से , औरतों के परेशानियों को न समझने वाले लोगों से ...और आखिरकार एक दिन वो जीत जाता है।

ये महज एक फिल्म की कहानी नहीं हैं ये एक सच्ची घटना है जो ठीक आज से 16 साल पहले यानी 2001 में अरुणाचलम मुरुगनंथम नाम के शख्स ने सैकड़ो परेशानियां जो उसके रास्तें में रोड़े बन रहे थे, उनसे जूझते हुए महिलाओं को पैड इस्तेमाल करने के लिए उसकी फैक्ट्री बना डाली थी। इसी सच्ची कहानी पर आधारित फिल्म पैडमैन के जरिए निर्देशक आर. बाल्की और अक्षय कुमार ने मेंस्ट्रुअल हाइजीन के प्रति लोगों को जागरूक करने की दमदार पहल की है।

कहानी-

फिल्म में लक्ष्मीकांत चौहान (अक्षय कुमार) को गायत्री यानी (राधिका आप्टे) से शादी करने के बाद पता चलता है कि माहवारी के दौरान उसकी पत्नी न केवल गंदे कपड़े का इस्तेमाल करती है बल्कि उसे अछूत औरत की तरह 5 दिन घर से बाहर रहना पड़ता है। उसे जब डॉक्टर से पता चलता है कि उन दिनों में महिलाएं गंदे कपड़े, राख, छाल आदि का इस्तेमाल करके कई जानलेवा और खतरनाक रोगों को दावत देती हैं तो वह खुद सैनिटरी पैड बनाने की कवायद में जुट जाता है।

और इन सब के बीच और अपने पत्नी, बहन और मां से अपमान का सामना करना पड़ता है, उसके इस निर्णय से समाज और गांववाले उसे एक तरह से बहिष्कार कर देते है, लेकिन लक्ष्मीकांत चौहान जितना ज्यादा इसको लेकर जलील होता है उतनी ही ज्यादा सैनिटरी पैड बनाने की उसकी जिद दिन ब दिन पक्की होती जाती है। जिसके चलते परिवार उसे छोड़ देता है, मगर वह अपनी धुन नहीं छोड़ता और आगे इस सफर में उसकी जिद को सच में बदलने के लिए दिल्ली की एमबीए स्टूडेंट परी यानी (सोनम कपूर) उसका साथ देती है। इस बीच कहानी में कई ट्विस्ट और टर्न आते है आखिरकार इसको अंजाम मिलता है जिसे जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।