दिलचस्प कहानियों पर बनने वाली छोटी फिल्म सफलताओं की बुलंदी छूने लगी हैं और अब ऐसी फिल्मों के निर्माण के लिये कई लोग आगे आने लगे हैं। इसी क्रम में आशिष राज और सिमरन की जोड़ी के साथ इंट्रेस्टिंग प्वाइंट को लव स्टोरी और कॉमेडी से पिरोकर तेलुगु फिल्म 'इगो' को पर्दे पर उतारा गया है। तो क्या यह कोशिश दर्शकों को आकर्षित करेगी...?

कहानी:

गोपी (आशिष राज) और इंदु (सिमरन) दोनों 'इगो' (अहंकार) से एक-दूसरे को हराने की कोशिश करते हैं। पीढ़ियों से दोनों के परिवारों के बीच झगड़ा छिड़ा हुआ है। इससे इंदु को परेशान करने के इरादे से गोपी और गोपी को मुश्किल में डालने के लिए इंदु योजनाएं बनाती हैं। इन दोनों की लड़ाई का पता जब उनके घर वालों को चलता है तो इंदु के घर वाले उसके लिये रिश्ता ढूंढना शुरू करते हैं।

फिल्म के एक गाने में आशिष राज व सिमरन
फिल्म के एक गाने में आशिष राज व सिमरन

इसी क्रम में इंदू की सगाई अमेरिका में बसे एक लड़के से तय होती है। इस पर गोपी यह चुनौती देकर घर छोड़ हैदराबाद आ जाता है कि इंदु से पहले वह एक अच्छी और खूबसूरत लड़की से शादी करेगा। तभी इंदु और गोपी को महसूस होता है कि उनके बीच लड़ाई नहीं बल्कि प्यार है

दोनों जब एक-दूसरे से मिलने की कोशिश करते हैं तभी एक हत्या के सिलसिले में पुलिस आशिष को गिरफ्तार कर लेती है। पूर्वी (दीक्षा पंत) नाम की एक युवती की निर्मम हत्या हो जाती है। युवती के सेलफोन में गोपी के साथ ली हुई सेल्फी और हत्या से पहले गोपी के साथ 40 मिनट तक हुई बातचीत और हत्या के बाद पूर्वी के बैंक खाते से गोपी द्वारा 40 हजार डालर ड्रा करने से जुड़े टीवी फूटेज साक्ष्य के तौर पर पेश किये जाते हैं।

फिल्म का एक दृश्य
फिल्म का एक दृश्य

इसपर सभी मानने लगते हैं कि गोपी ने ही पूर्वी की हत्या की है। वास्तव में पूर्वी की हत्या किसने की है... ? इस मामले में गोपी को क्यों फंसया गया...? इस मामले से गोपी कैसे बाहर निकला... यही इस फिल्म की बाकी कहानी है।

कलाकार:

तेलुगु फिल्म 'आकताई' से टॉलीवुड में डेब्यू करने वाले आशिष राज ने दूसरी कोशिश में खुद को एक अच्छे कलाकार साबित करने का प्रयास किया है और कुछ हद तक वे सफल भी रहे हैं। डांस और एक्शन से दर्शकों को आकर्षित कर चुके इस यंग एक्टर ने हालांकि काफी कोशिश की है, फिर भी दर्शकों का दिल नहीं जीत सके हैं।

अभिनेत्री के रूप में टॉलीवु़ड में डेब्यू कर चुकी सिमरन ने खूबसूरती के साथ अभिनय भी काफी अच्छा किया है। बिग बॉस फेम दीक्षा पंत की किरदार बहुत छोटी है, लेकिन उन्होंने किरदार के साथ पूरा इंसाफ किया है। राऊ रमेश, पृथ्वी, पोसानी कृष्णमुरली की रुटीन कॉमेडी भूमिकाओं ने दर्शकों को निराश किया है। हालांकि फर्स्ट हॉफ में पृथ्वी ने अपनी कॉमेडी से कुछ हद तक दर्शकों को बांधे रखने की कोशिश की है।

विश्लेषण : हत्या के मामले में फंसा एक युवक कैसे खुद को निर्दोष साबित करता है, इस दिलचस्प प्वाइंट को कहानी बनाने वाला निर्देशक उस प्वाइंट को दिलचस्प अंदाज में पर्दे पर उतारने में पूरी तरह से फेल रहा है। मेन प्वाइंट के सपोर्ट में ली गई प्रेम कहानी और कॉमेडी दर्शकों को रास नहीं आ रही है।

सेकेंड हॉफ में असली कहनी नहीं दोहराने से दर्शकों की सहनशक्ति टूट जाती है। कहानी में जबरन शामिल किये गये पंच डायलॉग और कॉमेडी सीन्स दर्शकों को रास नहीं आए। परंतु मर्डर केस में हीरो की गिरफ्तारी के सीन्स कुछ दिलचस्प हैं, लेकिन इसी स्तर पर फिल्म को आगे नहीं बढ़ा पाए निर्देशक। साई कार्तिक की म्यूजिक काफी अच्छा है। मुख्य रूप से संगीत लोगों का दिल जीत लिया है।